खतरे के निशान से नौ फीट ऊपर नदी, नाव से रेस्क्यू व ड्रोन से की जा रही निगरानी
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : धर्मनगरी में हुई भारी बारिश के बाद मंदाकिनी नदी ने शनिवार को रौद्र रूप धारण कर लिया। रामघाट पर नदी का खतरे का निशान 126 फीट है, जबकि जलस्तर 135 फीट से ऊपर पहुंच गया। तेज बहाव के कारण रामघाट, निर्मोही अखाड़ा और आसपास के इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई। बीच नदी में स्थित मतगजेंद्रनाथ मंदिर समेत आसपास के मंदिरों और मकानों में फंसे लोगों को नाव और मोटरबोट की मदद से सुरक्षित निकाला गया। तेज धारा के कारण राहत एवं बचाव कार्य में भी कठिनाई का सामना करना पड़ा।
प्रशासन ने मंदाकिनी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए मारकुंडी से मानिकपुर और थाना कर्वी क्षेत्र में नदी किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी कर दिया। सुबह से ही ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। विस्थापित लोगों के लिए भोजन और लंच पैकेट की व्यवस्था कराई गई है। मण्डलायुक्त अजीत कुमार, पुलिस उपमहानिरीक्षक राजेश एस, जिलाधिकारी पुलकित गर्ग व पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर नुकसान का जायजा लिया। मौके पर सीडीओ, एडीएम और एसडीएम समेत प्रशासनिक टीम मौजूद रहकर स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन के मुताबिक वर्तमान बाढ़ का जलस्तर वर्ष 2003 और पिछले वर्ष आई बाढ़ के स्तर से भी अधिक है। हालांकि जिले में बारिश रुक गई है, लेकिन मध्य प्रदेश के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश होने के कारण फिलहाल मंदाकिनी का जलस्तर घटने की संभावना कम है। अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर स्थिर होने के बाद धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद है।
पुलिस ने बाढ़ प्रभावित रामघाट और निर्मोही अखाड़ा क्षेत्र में ड्रोन कैमरे से निगरानी कराई। ड्रोन के जरिए जलभराव वाले क्षेत्रों, घाटों, फंसे लोगों और आवागमन मार्गों की स्थिति का जायजा लिया गया। प्राप्त फुटेज के आधार पर राहत एवं बचाव दलों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। खतरनाक घाटों पर बैरिकेडिंग और लगातार गश्त के निर्देश भी दिए गए हैं। बाढ़ की स्थिति में कुछ लोगों द्वारा नदी में कूदकर दुस्साहस करने की घटनाएं भी सामने आईं, जिन्हें गोताखोरों और मोटरबोट की सहायता से रेस्क्यू किया गया। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि चेतावनी को गंभीरता से लें और अपनी क्षमता का गलत आकलन कर नदी या गहरे पानी में जाने से बचें। सभी घाटों पर पुलिस बल तैनात है और श्रद्धालुओं तथा स्थानीय लोगों को लगातार सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस समय सर्वोच्च प्राथमिकता जनहानि रोकना है। लोगों से अपील की गई है कि अलर्ट मिलते ही घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं और राहत-बचाव कार्य में प्रशासन का सहयोग करें। किसी भी आपात स्थिति में डायल-112 या पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देने को कहा गया है।


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