बुजुर्ग बताते हैं- वर्षों से चली आ रही है परंपरा,रक्षाबंधन पर मेला,दंगल और झांकियां बनीं आकर्षण का केंद्र
पैलानी/बांदा, के एस दुबे । देश-विदेश में शुक्रवार को सावन पूर्णिमा पर रक्षाबंधन का पर्व मनाया गया, लेकिन बुंदेलखंड के जसपुरा क्षेत्र में शनिवार को भाई-बहन के प्रेम का पर्व मनाया गया। यहां महोबा की तर्ज पर रक्षाबंधन एक दिन बाद मनाने की परंपरा चली आ रही है। शनिवार को बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनकी लंबी उम्र की कामना की।स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि महोबा की तर्ज पर जसपुरा में भी वर्षों से रक्षाबंधन एक दिन बाद मनाया जाता है।उनके अनुसार,इस दिन केवल राखी बांधने की परंपरा ही नहीं है, बल्कि गांव में मेले,दंगल और आकर्षक झांकियों का भी आयोजन होता रहा है।बुजुर्गों ने बताया कि उन्होंने बचपन से ही रक्षाबंधन के अगले दिन इस तरह के आयोजन होते देखे हैं।शनिवार को भी त्योहार को लेकर कस्बें में उत्साह का माहौल रहा।बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया,आरती उतारी और कलाई पर राखी बांधी।भाइयों ने बहनों को उपहार देकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया। घरों में तरह-तरह के पकवान बनाए गए।
रक्षाबंधन के साथ मेले की भी रही परंपरा
जसपुरा में रक्षाबंधन के अगले दिन लगने वाला मेला भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा है।बुजुर्गों के मुताबिक पहले मेले में दूर-दराज के गांवों से भी लोग पहुंचते थे। बच्चों के लिए झूले और खिलौने से लेकर खान-पान की दुकानें तक सजती थीं। वहीं दंगल में आसपास के पहलवान अपनी कुश्ती का प्रदर्शन करते थे।
झांकियों में दिखती थी धार्मिक आस्था की झलक
रक्षाबंधन के अवसर पर निकलने वाली झांकियां भी इस परंपरा का अहम हिस्सा रही हैं।भगवान श्रीकृष्ण, राधा-कृष्ण,भगवान शिव समेत विभिन्न धार्मिक स्वरूपों की झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती थीं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि त्योहार के मौके पर निकलने वाली इन झांकियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र होते थे।स्थानीय लोगों का कहना है कि जसपुरा की यह परंपरा सिर्फ एक दिन बाद राखी बांधने तक सीमित नहीं है,बल्कि इसके साथ जुड़ा मेला,दंगल और झांकियों का आयोजन क्षेत्र की पुरानी सांस्कृतिक पहचान रहा है।बदलते समय के साथ आयोजनों का स्वरूप भले बदला हो,लेकिन एक दिन बाद रक्षाबंधन मनाने की परंपरा आज भी कायम है।देश में एक दिन पहले रक्षाबंधन मनाए जाने के बाद जसपुरा में शनिवार को बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी तो गांव की पुरानी परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी।


No comments:
Post a Comment