चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : तुलसी जन्म कुटीर तुलसी घाट में आयोजित कथा में बुधवार को भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। संत रामदास महाराज ने संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास के जीवन चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनने के लिए नगर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। तुलसीदास के जीवन प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। संत रामदास महाराज ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने जन्म लेते ही राम नाम का उच्चारण किया था। इसी कारण बचपन में उन्हें रामबोला नाम से पुकारा गया। उन्होंने बताया कि जन्म के बाद ही माता हुलसी के देहांत के कारण तुलसीदास को बचपन में अनेक कठिन
परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। सामाजिक उपेक्षा के बावजूद उनकी भक्ति और राम के प्रति समर्पण लगातार बढ़ता गया। कथा के दौरान संत ने कहा कि तुलसीदास जैसे महान संत के जीवन को सही संदर्भ में समझने की आवश्यकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि संतों के जीवन और उनके साहित्य को लेकर भ्रामक बातों से बचें। संत रामदास महाराज ने कहा कि तुलसी भारतीय सनातन परंपरा में केवल एक पौधा नहीं, बल्कि आस्था और आध्यात्मिक जीवन का महत्वपूर्ण आधार है। प्रत्येक परिवार को तुलसी के महत्व को समझते हुए उससे जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि तुलसी के प्रति श्रद्धा और भक्ति मनुष्य को सद्गति एवं मोक्ष के आध्यात्मिक मार्ग की ओर ले जाती है।


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