बबेरू / बाँदा, के एस दुबे । योगी सरकार भले ही गाँवों के विकास के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही हो, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और प्रधान किस तरह सरकारी धन पर डाका डाल रहे हैं, इसकी बानगी बबेरू विकास खंड की ग्राम पंचायत बबेरू ग्रामीण में देखने को मिली है। संपूर्ण समाधान दिवस में हुई शिकायत पर जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित जांच टीम ने जब भौतिक सत्यापन किया, तो करीब 38 लाख रुपये के गबन और घपले का खुलासा हुआ। मनरेगा से पहले ही बन चुकी सीसी सड़कों (जैसे रामअवतार से मोतीलाल के घर तक) को राज्यवित्त से दोबारा दिखाकर करीब 3.95 लाख रुपये हजम कर लिए गए। भगवानदीन से कामता के घर तक बनी 4.28 लाख
रुपये की सीसी रोड में मानक की अनदेखी मिली। इस्टीमेट में जोड़ी गई बॉक्सिंग मौके पर गायब मिली और केवल 2 इंच मटेरियल ही मिला। बबेरू देहात को चकाचौंध करने के नाम पर एक नॉन-रजिस्टर्ड कंपनी से करीब 58 लाख रुपये की सोलर व स्ट्रीट लाइटें लगवाने का दावा किया गया, जबकि मौके पर इतनी लाइटें मिलना तो दूर, उनका भौतिक वजूद भी संदिग्ध है। जांच के दौरान तत्कालीन सचिव अरविंद कुमार और कंसलटिंग जेई अनिल कुमार नदारद रहे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सचिव द्वारा कई कार्यों के रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। जांच टीम में शामिल डीसी एनआरएलएम दिवाकर सिंह और एक्सईएन आरईडी संदीप अग्रवाल ने कहा कि स्थलीय निरीक्षण कर लिया गया है, और अभिलेखों का मिलान कर जल्द ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी।


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