वनवासी बहनों ने गायत्री शक्तिपीठ में बांधा रक्षा सूत्र
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : रक्षाबंधन पर वन संस्कृति से जुड़ी करीब एक दर्जन वनवासी महिलाएं मंगलगीत गाते हुए धर्मनगरी स्थित गायत्री शक्तिपीठ पहुंचीं। उन्होंने शक्तिपीठ के व्यवस्थापक डॉ. रामनारायण त्रिपाठी को रक्षा सूत्र बांधकर उनके स्वस्थ, दीर्घायु एवं मंगलमय जीवन की कामना की। डॉ. त्रिपाठी ने भी बहनों को उपहार भेंट कर सम्मान के साथ विदा किया। इस अवसर पर डॉ. त्रिपाठी ने राजा बलि और माता लक्ष्मी समेत रक्षासूत्र से जुड़े पौराणिक प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर धागा बांधने का पर्व नहीं, बल्कि विश्वास, संरक्षण, त्याग, स्नेह और कर्तव्यबोध का संस्कार है। भाई का दायित्व बहन के सम्मान, स्वाभिमान और

अधिकारों की रक्षा करना है, जबकि बहन भाई को धर्म और सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि रक्षा का भाव परिवार से आगे बढ़कर समाज, संस्कृति और राष्ट्र तक विस्तृत है। नई पीढ़ी को रक्षाबंधन के मूल संदेश से जोड़ना जरूरी है। जिला पंचायत सदस्य सोना बाई ने कहा कि सगे भाई न होने के बावजूद हर त्योहार पर यहां भाई का स्नेह और अपनापन मिलता है। जय बिरसा मुंडा ग्रामीण विकास एवं शोध समिति के सचिव राजेश त्रिपाठी ने कहा कि वनवासी समाज भारतीय संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ा है। इस मौके पर संदीप रिछारिया, अनूप तिवारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य का संकल्प ही रक्षाबंधन का संदेश: डॉ. त्रिपाठी
वनवासी बहनों ने गायत्री शक्तिपीठ में बांधा रक्षा सूत्र
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : रक्षाबंधन पर वन संस्कृति से जुड़ी करीब एक दर्जन वनवासी महिलाएं मंगलगीत गाते हुए धर्मनगरी स्थित गायत्री शक्तिपीठ पहुंचीं। उन्होंने शक्तिपीठ के व्यवस्थापक डॉ. रामनारायण त्रिपाठी को रक्षा सूत्र बांधकर उनके स्वस्थ, दीर्घायु एवं मंगलमय जीवन की कामना की। डॉ. त्रिपाठी ने भी बहनों को उपहार भेंट कर सम्मान के साथ विदा किया। इस अवसर पर डॉ. त्रिपाठी ने राजा बलि और माता लक्ष्मी समेत रक्षासूत्र से जुड़े पौराणिक प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर धागा बांधने का पर्व नहीं, बल्कि विश्वास, संरक्षण, त्याग, स्नेह और कर्तव्यबोध का संस्कार है। भाई का दायित्व बहन के सम्मान, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा करना है, जबकि बहन भाई को धर्म और सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि रक्षा का भाव परिवार से आगे बढ़कर समाज, संस्कृति और राष्ट्र तक विस्तृत है। नई पीढ़ी को रक्षाबंधन के मूल संदेश से जोड़ना जरूरी है। जिला पंचायत सदस्य सोना बाई ने कहा कि सगे भाई न होने के बावजूद हर त्योहार पर यहां भाई का स्नेह और अपनापन मिलता है। जय बिरसा मुंडा ग्रामीण विकास एवं शोध समिति के सचिव राजेश त्रिपाठी ने कहा कि वनवासी समाज भारतीय संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ा है। इस मौके पर संदीप रिछारिया, अनूप तिवारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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