चित्रकूट ब्यूरो, सुखेन्द्र अग्रहरि : धर्मनगरी स्थित गायत्री शक्तिपीठ में शिक्षक गरिमा शिविर का आयोजन हुआ। जिसमें शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र, गायत्री मंत्र के दुपट्टे और साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया। शिविर में ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक चैबे ने कहा कि शिक्षक अपने प्रेम, व्यवहार और गरिमा के माध्यम से छात्रों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। शिक्षक का प्रभाव केवल शिक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण है। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार के प्रतिनिधि एवं प्रयाग विश्वविद्यालय के प्रो. सब्यसाची त्रिपाठी ने कहा कि गुरु-शिष्य संबंध की आधारशिला प्रेम रही है। आज शिक्षक को विद्यार्थियों की
समस्याओं को समझकर उन्हें बदलती परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करने और राष्ट्र निर्माण के संस्कार देने की जरूरत है। गायत्री शक्तिपीठ के संचालक डॉ. रामनारायण त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षक गौरव और गरिमा के साथ समाज में परिवर्तन के आधार बन सकते हैं। शिविर की अध्यक्षता करते हुए हरिमोहन सिंह ने भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में शिक्षकों की सहभागिता पर जोर दिया। वक्ताओं ने युवाओं में नशा, व्यसन और कुरीतियों को दूर करने के लिए योजनाबद्ध प्रयास की आवश्यकता बताई। इस दौरान शिक्षिक अखिलेश पांडेय, जगदीश गौतम, डॉ. गोपाल मिश्रा, डॉ. मनोज द्विवेदी, रचना यादव, जितेंद्र सिंह, विजय चंद्र गुप्ता समेत अनेक शिक्षकों ने गायत्री परिवार के विचारों से जुड़कर समाज निर्माण में योगदान का संकल्प लिया। शिविर में जिले के करीब 200 शिक्षक, प्राचार्य व शिक्षाविद मौजूद रहे।


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