जलस्तर खतरे के निशान से नीचे पहुंचा, अब राहत और पुनर्बहाली पर जोर
चित्रकूट ब्यूरो, सुखेन्द्र अग्रहरि : कई दिनों की लगातार बारिश के बाद उफनाई मंदाकिनी नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे नीचे आने लगा है। रविवार को नदी का जलस्तर करीब 126 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से लगभग आधा मीटर नीचे है। जलस्तर कम होने से प्रशासन और प्रभावित लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन बाढ़ अपने पीछे बड़े पैमाने पर तबाही छोड़ गई है। घरों, दुकानों, मंदिरों, सड़कों और संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचा है। बिजली और पेयजल आपूर्ति भी कई क्षेत्रों में प्रभावित हुई है। रामघाट, निर्मोही अखाड़ा और आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घरों और धार्मिक स्थलों में घुस गया था। प्रशासन ने नाव और मोटरबोट की मदद से फंसे
लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। राहत शिविरों में ठहरे लोगों के लिए भोजन और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की गई। सामाजिक संस्थाओं ने भी प्रशासन के साथ मिलकर राहत कार्य में सहयोग किया। मारकुंडी क्षेत्र के डोडामाफी बांध से पानी आने के बाद आसपास के गांवों में स्थिति गंभीर हो गई। ग्रामीणों ने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। बांध से जुड़े खतरे को लेकर ग्रामीण पहले से आशंकित थे। प्रशासन ने संवेदनशील गांवों में निगरानी बढ़ाते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। मानिकपुर क्षेत्र में बरदहा नदी के उफान ने कई गांवों की मुश्किलें बढ़ा दीं। छेरिहा खुर्द, गजाधर का पुरवा, जारोमाफी, करौहा, कल्याणपुर, निही, चरैया, गिदुरहा, रानीपुर और कुबरी सहित कई गांव प्रभावित हुए। कई संपर्क मार्गों पर पानी भरने से आवागमन बाधित रहा। चमरौहा रपटा के ऊपर भी पानी बहने से कई गांवों का संपर्क टूट गया। कुछ घरों के क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी सामने आई।
बारिश का पानी रेलवे ट्रैक तक पहुंचने से मानिकपुर-सतना और मानिकपुर-नैनी रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ। कई ट्रेनें रास्ते में घंटों खड़ी रहीं। वहीं मारकुंडी-टिकरिया के बीच करीबराह नाले पर बना पुल भी तेज बहाव की चपेट में आ गया। सड़क का एक हिस्सा बहने से मानिकपुर-सतना मुख्य मार्ग पर आवागमन बाधित हुआ। कर्वी-बेड़ी पुलिया मार्ग को जोड़ने वाले पुल की एप्रोच रोड का एक हिस्सा मिट्टी के सेटलमेंट के कारण क्षतिग्रस्त हो गया। सुरक्षा के मद्देनजर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी गई है। एनएचएआई और जिला प्रशासन की टीम तकनीकी जांच के साथ मरम्मत कार्य में जुटी है। प्रशासन का प्रयास है कि आवश्यक कार्य पूरा कर मार्ग को जल्द सामान्य किया जाए।
बाढ़ के बाद बीमारी और संक्रमण की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 24 बाढ़ चैकियां सक्रिय की हैं। पहाड़ी में छह, रामनगर में तीन और मऊ में 15 चैकियों पर चिकित्सकीय टीमें तैनात हैं। ओआरएस, क्लोरीन, ब्लीचिंग पाउडर और जीवनरक्षक दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। 108 और 102 एंबुलेंस के साथ रैपिड रिस्पांस टीमें भी अलर्ट पर हैं। प्रभावित क्षेत्रों में दवा वितरण और एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। पुलिस ने रामघाट और निर्मोही अखाड़ा क्षेत्र में ड्रोन से निगरानी कर फंसे लोगों, जलभराव और आवागमन मार्गों की स्थिति का जायजा लिया। सभी प्रमुख घाटों पर पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने लोगों से नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा क्षतिग्रस्त मार्गों पर आवागमन न करने की अपील की है।
जलस्तर घटने के साथ प्रशासन के सामने अब बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन और जनजीवन को सामान्य करना बड़ी चुनौती है। प्रभावित घरों की सफाई, बिजली-पानी की बहाली, सड़कों और पुलों की मरम्मत तथा राहत सामग्री पहुंचाने का काम प्राथमिकता पर है। प्रशासनिक टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही हैं। मंदाकिनी का पानी भले ही उतरने लगा हो, लेकिन चित्रकूट में बाढ़ की छोड़ी हुई तबाही को समेटने में अभी लंबा वक्त लग सकता है।
रोटरी क्लब के तत्वावधान में आज रामघाट पर सेवा कार्य करते हुए जरूरतमंदों एवं श्रद्धालुओं को 500 भोजन पैकेट तथा पानी की बोतलों का वितरण किया गया। रोटरी क्लब के सदस्यों ने कहा कि मानव सेवा ही सच्ची सेवा है। क्लब भविष्य में भी इसी प्रकार जनकल्याण एवं सामाजिक सेवा से जुड़े कार्य निरंतर करता रहेगा। इस मौके पर पंकज अग्रवाल, विवेक अग्रवाल, स्वप्निल अग्रवाल, सुधांशु अग्रवाल, अर्जुन जैन, अमन अग्रवाल सहित रोटरी क्लब के अन्य सदस्य मौजूद रहे।



No comments:
Post a Comment