प्रमुख घाटों पर स्थायी कुंड बनाने की बुंदेली सेना ने की मांग
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । मंदाकिनी नदी में आई भीषण बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए विसर्जन कुंड के पुनर्निर्माण तथा कर्वी और चित्रकूट क्षेत्र के प्रमुख घाटों पर स्थायी हवन-पूजन सामग्री विसर्जन कुंड बनाए जाने की मांग बुंदेली सेना ने जिलाधिकारी पुलकित गर्ग से की है। बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि संगठन के लगातार प्रयासों के बाद नगर पालिका द्वारा मंदाकिनी नदी पुल के पास हवन-पूजन सामग्री के विसर्जन के लिए कुंड का निर्माण कराया गया था। हाल में आई भीषण बाढ़ में यह कुंड क्षतिग्रस्त होकर नष्ट हो गया। इसके चलते पूजा-पाठ के बाद निकलने वाली सामग्री के दोबारा सीधे नदी में प्रवाहित किए जाने की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि
फूल-माला, कपड़े, मूर्तियां, पालीथिन, दोना-पत्तल, फोटो, हवन सामग्री सहित अन्य पूजन अवशेष नदी में जाने से मंदाकिनी का प्रदूषण बढ़ सकता है। बाढ़ के बाद नदी का जल और घाट काफी हद तक साफ हुए हैं। ऐसे में नदी को दोबारा प्रदूषित होने से बचाने के लिए अभी से प्रभावी व्यवस्था किए जाने की आवश्यकता है।
अजीत सिंह ने बताया कि पूर्व में बनाए गए विसर्जन कुंड के सकारात्मक परिणाम सामने आए थे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजन सामग्री नदी में प्रवाहित करने के बजाय निर्धारित कुंड में डाल रहे थे। इससे घाटों की स्वच्छता बनाए रखने में भी मदद मिली। बुंदेली सेना ने मांग की है कि मंदाकिनी पुल के पास बाढ़ में क्षतिग्रस्त पुराने विसर्जन कुंड का तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाए। इसके अलावा राजाघाट और सुंदरघाट पर सुरक्षित स्थान चिन्हित कर स्थायी विसर्जन कुंड बनाए जाएं। रामघाट के पास पन्नालाल घाट तथा बूढ़े हनुमानजी मुक्तिधाम स्थल के पास भी अलग-अलग विसर्जन कुंडों का निर्माण कराया जाए। संगठन ने यह भी सुझाव दिया कि कुंडों का निर्माण इस तरह किया जाए कि वे सामान्य दिनों के साथ-साथ बाढ़ के दौरान भी सुरक्षित रहें और नदी के तेज बहाव से क्षतिग्रस्त न हों। प्रत्येक कुंड पर स्पष्ट सूचना-पट्ट लगाया जाए— “पूजन सामग्री नदी में न डालें, निर्धारित विसर्जन कुंड में ही डालें।”
साथ ही नगर पालिका एवं संबंधित विभागों के माध्यम से कुंडों की नियमित सफाई, रखरखाव और पूजन सामग्री के उचित निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा धार्मिक पर्वों से पहले घाटों पर जनजागरूकता अभियान चलाने की मांग की गई है। अजीत सिंह ने कहा कि पर्याप्त और व्यवस्थित विसर्जन कुंड उपलब्ध होने से श्रद्धालुओं को सुविधाजनक विकल्प मिलेगा और मंदाकिनी नदी को प्रदूषण से बचाने में प्रशासन को भी प्रभावी सहयोग मिलेगा।


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