देवेश प्रताप सिंह राठौर
उन्नाव । उन्नाव जनपद के प्रतिष्ठित कमलावती हॉस्पिटल एवं कमलावती रिसर्च एंड वेलफेयर फाउंडेशन के संस्थापक डॉ० एस.के. वर्मा एवं उनकी पत्नी समाज सेविका डॉ० आंचल वर्मा की भांजी कु० प्रत्यूषा लाल का "जन्म दिन" इस बार सामाजिक सरोकार और सेवा भावना से परिपूर्ण वातावरण में मनाया गया । कु० प्रत्यूषा लाल के "जन्म दिन" को यादगार और सार्थक बनाने के उद्देश्य से परिवार के सदस्यों ने उन्नाव जनपद के एकमात्र "जॉनसन मूक-बधिर विद्यालय" में पहुंचकर वहां अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के साथ "जन्म दिन" की खुशियां साझा कीं । विद्यालय परिसर में कु० प्रत्यूषा ने बच्चों के बीच केक काटकर अपना "जन्म दिन" मनाया इसके बाद उन्होंने विद्यालय के छात्र-छात्राओं को अपने हाथों से केक खिलाया बच्चों ने भी पूरे उत्साह और उल्लास के साथ "जन्म दिन" समारोह में सहभागिता की ।
इस अवसर पर कु० प्रत्यूषा की माता श्रीमती विजय लक्ष्मी एवं पिता राजीव रतन लाल द्वारा विद्यालय के छात्र-छात्राओं के लिए पिज्जा,फ्रूटी एवं टी-शर्ट की व्यवस्था की गई बच्चों को उपहार एवं खाद्य सामग्री वितरित किए जाने से उनके चेहरों पर खुशी देखते ही बन रही थी "जन्म दिन" समारोह के दौरान विद्यालय में काफी आत्मीय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण दिखाई दिया । परिवार के सदस्यों ने कहा कि "जन्म दिन" केवल अपने परिवार और मित्रों के बीच मनाने के बजाय यदि समाज के ऐसे बच्चों के साथ मनाया जाए, जिन्हें विशेष स्नेह, सहयोग और प्रोत्साहन की आवश्यकता है तो "जन्म दिन" की खुशी कई गुना बढ़ जाती है इसी भावना के साथ प्रत्यूषा लाल का "जन्म दिन" मूक-बधिर विद्यालय के बच्चों के बीच मनाने का निर्णय लिया गया ।
"जन्म दिन" समारोह के साथ ही "शिक्षक दिवस" के अवसर पर विद्यालय के "शिक्षक" एवं "शिक्षिकाओं" के "सम्मान" का भी कार्यक्रम आयोजित किया गया "शिक्षक" समाज को दिशा देने और विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं इसी भावना के साथ प्रत्यूषा के नाना कमल वर्मा,नानी श्रीमती कलावती,मौसा रंजीत सिंह एवं मौसी श्रीमती स्वर्णिमा की ओर से विद्यालय के सभी "शिक्षक" एवं "शिक्षिकाओं" को पेन भेंट कर "शिक्षक दिवस" की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की गईं । इस अवसर पर "शिक्षकों" के प्रति "सम्मान" व्यक्त करते हुए कहा गया कि "गुरु" का स्थान समाज में सदैव सर्वोच्च रहा है "शिक्षक" केवल विद्यार्थियों को शिक्षा ही नहीं देते,बल्कि उन्हें जीवन में आगे बढ़ने, आत्मनिर्भर बनने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने की "प्रेरणा" भी देते हैं ।
प्रत्यूषा लाल के "जन्म दिन" का यह आयोजन केवल एक "जन्म दिन" समारोह तक सीमित नहीं रहा,बल्कि इसने सेवा,संवेदना,समानता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया विशेष बच्चों के साथ समय बिताना,उनके साथ भोजन एवं खुशियां साझा करना तथा उन्हें उपहार प्रदान करना निश्चित रूप से एक सराहनीय पहल रही । परिवार के सदस्यों ने कहा कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति को समान प्रेम,सम्मान और अवसर मिलना चाहिए विशेष रूप से दिव्यांग एवं मूक-बधिर बच्चों के प्रति समाज का दृष्टिकोण संवेदनशील और सहयोगात्मक होना चाहिए। ऐसे आयोजनों के माध्यम से इन बच्चों के बीच अपनापन और आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है ।
"जन्म दिन" समारोह में बच्चों के साथ बिताए गए पल परिवार के लिए भी अत्यंत भावुक और यादगार रहे प्रत्यूषा एवं उनके परिवार ने बच्चों के साथ समय बिताकर न केवल उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेरी,बल्कि अपने इस विशेष दिन को सामाजिक सेवा और मानवीय संवेदना से जोड़कर एक "प्रेरणा दायी" उदाहरण प्रस्तुत किया । कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार एवं शिक्षकों ने प्रत्यूषा लाल तथा उनके समस्त परिवार को "जन्म दिन" की शुभ कामनाएं एवं "शिक्षक दिवस" के अवसर पर किए गए "सम्मान" के लिए आभार व्यक्त किया ।


No comments:
Post a Comment