चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : परम् संत बाबा उमाकांत महाराज ने सत्संग में कहा कि मानसिक शांति और शरीर को सुखी रखने के लिए संत मत को समझना और संतों के बताए मार्ग पर चलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रारंभ में मानव धर्म ही प्रमुख था, जिसके अंतर्गत सत्य, दया, परोपकार और सेवा को स्थान दिया गया था। वर्तमान में लोग इन मूल्यों से दूर होते जा रहे हैं, जिसके कारण समाज में मानवता और सदाचार का ह्रास हो रहा है।
उन्होंने कहा कि खराब खानपान, गिरता चरित्र तथा देश और धर्म के विरुद्ध किए जा रहे कार्यों का दुष्प्रभाव समाज पर पड़ रहा है। जिस प्रकार नियमों का उल्लंघन करने पर दंड मिलता है, उसी प्रकार प्रकृति और धर्म के विपरीत आचरण का परिणाम भी मनुष्य को भुगतना पड़ता है। यही कारण है कि आज किसान, व्यापारी, कर्मचारी, मजदूर और विद्यार्थी सहित विभिन्न वर्गों के लोग किसी न किसी शारीरिक, मानसिक या आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों ने संतों की संगति और सत्संग से दूरी बना ली है। आह्वान किया कि सुख, मानसिक शांति और प्रभु की कृपा प्राप्त करने के लिए संत मत को समझें तथा संतों के बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करें।


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