मिलेगा महाकवि कालिदास संस्कृत साधना पुरस्कार
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : जनपद के लिए गौरव और हर्ष का क्षण है। महाराष्ट्र शासन के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा दिया जाने वाला देश का अत्यंत प्रतिष्ठित सम्मान ’महाकवि कालिदास संस्कृत साधना पुरस्कार’ इस वर्ष उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपति ’प्रो. रमाकान्त पाण्डेय’ को प्रदान किये जाने की घोषणा की गई है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा यह पुरस्कार प्रतिवर्ष संस्कृत भाषा, साहित्य, दर्शन और संस्कृति के क्षेत्र में आजीवन साधना करने वाले देश के 8 मूर्धन्य विद्वानों को दिया जाता है। यह पुरस्कार केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि संस्कृत के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर की गई तपस्या की स्वीकृति है। चित्रकूट के मानिकपुर तहसील के सकरौंहा गांव निवासी प्रो. रमाकान्त पाण्डेय वर्तमान में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपति के रूप में
कार्यरत हैं। इससे पूर्व वे केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर के निदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनका व्यक्तित्व एक आदर्श शिक्षक, प्रखर शोधकर्ता, कुशल प्रशासक और परम्परा के पुनरुद्धारक का अद्भुत संगम है। प्रो. पाण्डेय को 31 वर्ष का अध्यापन व शोध तथा 15 वर्ष का प्रशासनिक अनुभव है। उन्होंने 25 शोधार्थियों को पीएचडी कराई है और 65 ग्रंथों तथा 150 शोध पत्रों का लेखन किया है। उनकी 27 पुस्तकें विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल हैं। इसके साथ ही उन्होंने 86 राष्ट्रीय संगोष्ठियों, 15 अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों और 57 कार्यशालाओं में सहभागिता कर भारत और संस्कृत का प्रतिनिधित्व किया है। अब तक उन्हें 14 राज्य स्तरीय एवं राष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है। प्रो. पाण्डेय ने पारम्परिक टीका लेखन परम्परा को पुनर्जीवित किया है। उन्होंने महाकवि गंगाधर शास्त्री कृत ‘अलिविलासिसंलाप‘, पंडित गोकुलनाथ कृत ‘शिवशतक‘ तथा आचार्य अभिनवगुप्त के दुर्लभ स्तोत्रों पर गहन और विद्वत्तापूर्ण टीकाएं लिखी हैं, जिनकी देश भर के विद्वानों ने मुक्त कंठ से सराहना की है। कुलपति के रूप में उन्होंने उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्वयन के साथ-साथ उन्होंने कर्मकांड ज्योतिष जैसे पारम्परिक विषयों के साथ-साथ ’अनुवाद विज्ञान और संस्कृत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ जैसे अत्याधुनिक पाठ्यक्रमों को प्रारंभ कर संस्कृत को भविष्य की तकनीक से जोड़ा है। महाराष्ट्र शासन द्वारा इस राष्ट्रीय सम्मान की घोषणा के बाद से उनके परिवार में हर्ष व्याप्त है। प्रो पाण्डेय के अनुज डॉ उदित नारायण पाण्डेय भी अपनी साहित्यिक कृतियों के लिये राष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित हो चुके हैं।


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