प्रधान पर फर्जी जॉबकार्ड से भुगतान कराने का आरोप
शिकायत पर गांव पहुंची जांच टीम, छह मजदूरों के बयान दर्ज
फतेहपुर, मो शमशाद । मलवां विकासखंड की ग्राम पंचायत भाऊपुर में मनरेगा के 42 लाख 43 हजार रुपये के कथित घोटाले की शिकायत से हड़कंप मचा हुआ है। ग्राम प्रधान गंगाप्रसाद उर्फ केशव तिवारी पर मनरेगा के कार्यों में कथित अनियमितता, फर्जी भुगतान और अपात्र लोगों के नाम जॉबकार्ड बनवाकर सरकारी धन का दुरुपयोग कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीण की शिकायत पर ब्लॉक स्तर से गठित तीन सदस्यीय जांच टीम गांव पहुंची और मामले की पड़ताल शुरू कर दी। टीम ने बुधवार को छह मनरेगा मजदूरों शिवा, भइया लाल, ओम नारायण, नीलम, गंगाराम और राजरानी के बयान दर्ज किए। अधिकारियों के अनुसार मामले में कुल 59 लोगों
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| जांच पडताल करती टीम। |
के बयान लिए जाने हैं। अब तक तीन दौर की जांच में 20 ग्रामीणों के बयान दर्ज हो चुके हैं और पूरे प्रकरण की 10 बिंदुओं पर जांच की जा रही है। ग्रामीण रज्जन सिंह उर्फ रावेन्द्र सिंह ने मुख्य विकास अधिकारी को शपथपत्र के साथ शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत में मनरेगा के नौ कार्यों में कथित तौर पर फर्जी भुगतान कराया गया। शिकायत में हरिशंकर के खेत से साई बॉर्डर तक मिट्टी पुराई, गाटा संख्या 1077 स्थित चारागाह में मेड़बंदी, नाली निर्माण और इंटरलॉकिंग समेत कई कार्यों का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि कागजों में कार्य दिखाकर भुगतान कराया गया, जबकि इन कार्यों की वास्तविकता और गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि सरकारी धन की निकासी में नियमों की अनदेखी की गई। मामले में सबसे गंभीर आरोप मनरेगा जॉबकार्ड को लेकर लगाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक ग्राम पंचायत में ऐसे लोगों के नाम भी जॉबकार्ड बनाए गए, जिन्होंने मनरेगा में काम नहीं किया। आरोप है कि प्रधान के रिश्तेदारों के अलावा 70 से 80 वर्ष तक के बुजुर्गों, बुजुर्ग महिलाओं, दिल्ली, कानपुर और गुजरात में नौकरी करने वाले लोगों, विकलांग पेंशनधारक, भागवताचार्य और यहां तक कि विदेश में रहने वाले व्यक्ति के नाम तक जॉबकार्ड में दर्ज किए गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि ग्राम पंचायत के करीब 90 प्रतिशत जॉबकार्ड धारकों ने मौके पर काम नहीं किया, इसके बावजूद उनके खातों में मनरेगा मजदूरी की रकम भेजकर निकासी कराई गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पूर्व में हुई जांच के दौरान भी कई सवाल सामने आए, लेकिन स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। ग्रामीणों ने जांच प्रक्रिया के दौरान विवाद की आशंका जताते हुए पुलिस बल की मौजूदगी में जांच कराने की मांग की है। साथ ही सभी जॉबकार्ड धारकों को मूल जॉबकार्ड के साथ बुलाकर उनका भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस व्यक्ति ने मनरेगा में काम किया और किसके नाम पर भुगतान कराया गया। ब्लॉक स्तरीय जांच टीम अब जॉबकार्ड, मस्टररोल, मजदूरी भुगतान, कार्यस्थल और अभिलेखों का मिलान कर पूरे मामले की हकीकत खंगाल रही है। अधिकारियों के मुताबिक जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। यदि जांच में फर्जी जॉबकार्ड, फर्जी भुगतान अथवा सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल भाऊपुर में कथित 42.43 लाख रुपये के मनरेगा घोटाले की जांच शुरू होने के बाद ग्रामीणों की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।


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