अष्टमी का कन्या पूजन 18 अक्तूबर और नवमी का कन्या पूजन 19 अक्तूबर को और 20 अक्टूबर को प्रात:09 :34 तक
शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ महाअष्टमी और महानवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व के आखिरी चरण में श्रद्धालु छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं और भोजन कराते हैं। शास्त्रों में 2 से 10 वर्ष तक की कन्या को देवी का साक्षात स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि कन्या पूजन के बिना नवरात्र का अनुष्ठान अधूरा रहता है। इसी बहाने नारी शक्ति के सम्मान का संकल्प भी लिया जाता है। नौ कन्याओं को मां नवदुर्गा का प्रतीक मानकर उनका पूजन
किया जाता है, जबकि एक बालक को भैरव के रूप में साथ में भोजन कराया जाता है। कन्याओं के चरण धोकर तिलक लगाने, चुनरी ओढ़ाने तथा हलवा-पूरी और चने का प्रसाद खिलाकर दक्षिणा देने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे मां भगवती प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-शांति, धन-धान्य की वृद्धि तथा सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
किया जाता है, जबकि एक बालक को भैरव के रूप में साथ में भोजन कराया जाता है। कन्याओं के चरण धोकर तिलक लगाने, चुनरी ओढ़ाने तथा हलवा-पूरी और चने का प्रसाद खिलाकर दक्षिणा देने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे मां भगवती प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-शांति, धन-धान्य की वृद्धि तथा सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
इस बार नवरात्रि की तिथियों को लेकर थोड़ा भ्रम है। काशी पंचांग अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष की महाअष्टमी तिथि 18 अक्तूबर को प्रात:काल 05:54 से पूरे दिन पूरी रात से 19 अक्तूबर की प्रात:06:53 बजे तक रहेगी, अत: अष्टमी का कन्या पूजन 18 अक्तूबर को कर सकते है और महानवमी तिथि 19 अक्टूबर को प्रात: 06:53 बजे से 20 अक्टूबर को प्रात :09:34 तक रहेगी, नवमी का कन्या पूजन 19 अक्तूबर को और 20 अक्टूबर को प्रात:09:34 तक कर सकते है प्रात:09:34 के बाद दशमी तिथि लग जाएगी 20 अक्टूबर को व्रत का पारण, दुर्गा मां की प्रतिमा का विसर्जन किया जायेगा और विजय दशमी पर्व मनाया जायेगा
- ज्योतिषाचार्य-एस.एस.नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ।


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