चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि - धर्मनगरी चित्रकूट में एक बार फिर से नवरात्रि में धूम देखने को मिल रही है, प्रतिदिन माँ दुर्गा के मंदिरों में जंहा भक्तों की पूजन-अर्चन और दर्शन की भीड़ जुट रही है तो वही दूसरी ओर देवी पंडालों में डांडिया व गरबा नृत्य महोत्सव की भी काफी धूम मची है। जिसमे सैकड़ो बालक व बालिकाएं ,पुरुष और महिलाएं देश के अलग-अलग प्रांतों से अलग अलग टोली बनाकर डांडिया व गरबा नृत्य कर रही है। इस नृत्य में लगभग 15 टीमें प्रतिभाग कर रही हैं का ऐसा ही सुंदर नजारा दुर्गा अष्टमी पर सद्गुरु सेवा ट्रस्ट चित्रकूट के परिसर में देखने को मिला जंहा एक भारत - श्रेष्ठ भारत और अनेकता में एकता की झलक देखने को मिलती है, जाति पाति ,ऊंच नीच, धर्म आदि का कोई भेदभाव नहीं है सब मिलजुलकर इस उत्सव में भाग लेते है।यंहा आयोजित भव्य गरबा
महोत्सव में जंहा बुंदेलखंडी व देशभक्ति नृत्य के साथ गुजरात का डांडिया व गरबा नृत्य देखने को मिला , इस आयोजन को देखने के लिए उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के आस-पास लोग बड़ी संख्या पंहुचते है। वहीं सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं निदेशक डॉ इलेश जैन ने बताया कि इस चित्रकूट ग्रामीण अंचल में समय समय पर कुछ उत्सव होते रहने चाहिए इससे लोगो में एकता और स्नेह की भावना बनी रहती है लगभग 32 - 35 वर्षों से ट्रस्ट में नवरात्रि के दिनो मे 9 दिन ये डांडिया कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है ये परम्परा गुजरात की
है इसकी नींव ट्रस्ट के प्रथम अध्यक्ष स्व. अरविंद भाई मफ़त ललक एवं मेरे पिता स्व. पद्मश्री डॉ बी के जैन एवं माता जी ऊषा जैन ने इसकी नींव रखी इसमें न जाति न धर्म न ऊंच नीच किसी भी प्रकार कोई भेदभाव नहीं किया जाता सब धर्म जाति के लोग एक साथ मिलकर इस गरबा नृत्य में भाग लेते है इससे सबमें भाई चारा बढ़ता है और जब आपस में भाई चारा बढ़ेगा तभी हमारा देश एक भारत श्रेष्ठ भारत और अनेकता में एकता का देश बनेगा और हमारी संस्कृति भी बची रहेगी। उन्होंने कहा कि भले हम लोग राज्यों में बटे हुए है पर हमारी परंपरा हमारी संस्कृति हमारे संस्कार सब एक है , और ये संस्कृतिऔर संस्कार को सहेजने का काम इस गरबा के माध्यम से होता है।



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