बांदा, के एस दुबे । कभी किराए की दुकान में छोटा-सा ब्यूटी पार्लर चलाने वाली बांदा की अनुराधा सोनी आज अपने घर में ही पार्लर संचालित कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत मिले 2 लाख रुपये के ऋण ने उनके कारोबार को विस्तार देने में मदद की। अब वह अपनी बहन अनू सोनी के साथ मिलकर पार्लर चला रही हैं और अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।बांदा शहर की आवास विकास कॉलोनी निवासी अनुराधा के मन में खुद का काम आगे बढ़ाने की इच्छा थी। शुरुआत में उन्होंने घर के पास किराए की दुकान लेकर ब्यूटी पार्लर शुरू किया। काम बढ़ने लगा तो उन्होंने इसे और बेहतर बनाने का फैसला किया। इसी दौरान उन्हें मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की जानकारी मिली। उन्होंने जिला उद्योग कार्यालय पहुंचकर योजना की प्रक्रिया पूरी की और अप्रैल 2026 में उन्हें 2 लाख रुपये का ऋण मिला। इस राशि की मदद से उन्होंने अपने घर में ही बेहतर सुविधाओं वाला ब्यूटी पार्लर तैयार किया।
किराए की दुकान से अपने पार्लर तक का सफर
अनुराधा के लिए घर में पार्लर शुरू करना कारोबार को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम साबित हुआ। पहले उन्हें पार्लर की आमदनी में से हर महीने दुकान का किराया भी देना पड़ता था। अब घर से ही कारोबार संचालित करने के कारण उन्हें काम को बेहतर ढंग से आगे बढ़ाने का अवसर मिला है। उनके पार्लर में लहंगे, ज्वेलरी और कॉस्मेटिक से जुड़ा सामान भी उपलब्ध है, जिससे ग्राहकों को कई सुविधाएं एक ही जगह मिलती हैं।
सीजन में एक लाख रुपये तक की कमाई
अनुराधा सोनी बताती हैं कि ब्यूटी पार्लर का काम सीजन के अनुसार चलता है। शादी-विवाह और अन्य व्यस्त सीजन में उनकी मासिक कमाई एक लाख रुपये तक पहुंच जाती है। उन्होंने बताया कि पूरे साल में करीब 5 से 6 लाख रुपये की बचत हो जाती है। उनकी बहन अनू सोनी भी पार्लर के काम में सहयोग करती हैं। दोनों बहनें मिलकर कारोबार संभाल रही हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
योजना ने दिया आगे बढ़ने का अवसर
अनुराधा के अनुसार, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना से मिले ऋण ने उनके कारोबार को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। पहले किराए की दुकान में सीमित संसाधनों के साथ काम करने वाली अनुराधा अब अपने घर से ही पार्लर चला रही हैं। उनका कहना है कि इस बदलाव से उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत होने और अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिला है। उनके लिए यह योजना जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई है।


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