बांदा, के एस दुबे । जनपद में धार्मिक, सामाजिक और अन्य आयोजनों के दौरान बजने वाले बेलगाम और अत्यधिक तीव्र आवाज वाले डीजी सिस्टम के कारण उत्पन्न हो रही गंभीर समस्या को लेकर नागरिकों ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में डीजे की तेज आवाज को केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि ष्चलती फिरती मौतष् करार देते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने, आयोजकों से अंडरटेकिंग लेने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने अवगत कराया है कि डीजे की तेज आवाज से आम नागरिक, बुजुर्ग, बीमार व्यक्ति और छोटे बच्चे अत्यधिक मानसिक तनाव, बहरेपन और हृदय रोग की चपेट में आ रहे हैं। इसका सबसे भयानक प्रभाव गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है, जिससे तेज आवाज के झटकों और कंपन
के कारण गर्भपात जैसी हृदय विदारक घटनाएं भी हो रही हैं। इसके अलावा मूक-बधिर जीव-जंतुओं और पर्यावरण का संतुलन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ज्ञापन में सर्वाेच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों द्वारा पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि तय डेसिबल सीमा से अधिक ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग गैर-कानूनी और नागरिकों के जीवन के अधिकार अनुच्छेद 21 का हनन है। साथ ही, सितंबर 2026 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ द्वारा बलरामपुर के एक स्कूल में डीजे के अत्यधिक तेज शोर के कारण कक्षा 2 की मासूम छात्रा वैष्णवी तिवारी की हुई दुखद मौत का स्वतः संज्ञान लिए जाने का भी हवाला दिया गया है। सार्वजनिक या निजी आयोजनों के लिए अनुमति देते समय आयोजकों/समितियों से यह लिखित अंडरटेकिंग ली जाए कि निर्धारित मानकों से अधिक ध्वनि प्रदूषण होने पर संपूर्ण जिम्मेदारी आयोजन समिति और उसके पदाधिकारियों की होगी। नियमों को ताक पर रखकर अत्यधिक तेज आवाज में डीजे संचालित करने वालों के विरुद्ध तुरंत मुकदमा दर्ज किया जाए, उनका डीजे जब्त किया जाए तथा उनका लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त किया जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में रविंद्र नाथ, वीरेंद्र गुप्ता, राजूगुुप्ता, पिंकी प्रजापति सहित अन्य जिम्मेदार नागरिक मौजूद रहे।


No comments:
Post a Comment