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Monday, October 21, 2024

जनपद में पराली जलाए जाने पर होगी कार्यवाही, "पराली न जलाएं" का व्यापक प्रचार प्रसार लगातार करने के निर्देश :- जिलाधिकारी

देवेश प्रताप सिंह राठौड़  

उत्तर प्रदेश झांसी एफ0पी0ओ0 का पंजीकरण एक वर्ष पूर्व होना अनिवार्य,सदस्यों की न्यूनतम संख्या 100 होने पर ही योजना का मिलेगा लाभ 

लाभार्थी एफ0पी0ओ0 को

रु0 30 लाख के निर्धारित कृषि यंत्र जैसे ट्रैक्टर 60 एचपी,बिलिंग मशीन, स्ट्रा रेक एवं कॉप रीपर आदि फसल अवशेष प्रबंधन वाले कृषि यंत्र करने होंगे क्रय

इक्षुक एफ0पी0ओ0 जल्द से जल्द अपना आवेदन पत्र राजकीय कृषि बीज भंडार/उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी अथवा उप कृषि निदेशक झाँसी कार्यालय में जमा कराएं 

 एफ0पी0ओ0 एवं उनके सदस्य कृषकों को एग्रीग्रेटर के रूप में अनुदानित पराली/फसल अवशेष प्रबन्धन के कृषि यंत्र होंगें उपलब्ध :- जिलाधिकारी 

विगत वर्ष जिन किसानों अथवा क्षेत्र में पराली की घटनाएँ हुई हैं, वहाँ लगेगी चौपाल, नहीं होने दी जाएगी पराली जलाने की घटना :-जिलाधिकारी 

झाँसी - जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने आज जनता दर्शन के दौरान बताया कि मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्य नाथ  की स्पष्ट मंशा है की क्षेत्र में किसी भी दशा में पराली/कृषि अवशेष को न जलाया जाये। जनपद में पराली/कृषि अवशेष को खेत में जलाने से रोकने के लिए कृषक उत्पादक संगठनों को जिम्मेदारी दी जा रही है, जिसके अंतर्गत "सब मिशन ऑन ऐग्रिकल्चर मैकेनाइजेशन" एवं इन- सीटू योजनांतर्गत एफ0पी0ओ0 अथवा एफ0पी0ओ0 के सदस्य कृषकों को ऐग्रिग्रेटर के रूप में अनुदान पर पराली/फसल अवशेष प्रबन्धन के कृषि यंत्र एवं संसाधन उपलब्ध कराये जाने हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में संचालित / स्थापित एफ0पी0ओ0 को गाइड लाइन के अनुसार एग्रीग्रेटर के रूप में अनुदान पर पराली / फसल अवशेष प्रबन्धन के कृषि यंत्र अनुदान पर दिये जाने हेतु शासन द्वारा दिशा निर्देश जारी किये गए है जिसके अंतर्गत जनपद में गठित कृषक उत्पादक संगठन (एफ0पी0ओ0) तथा एग्रीग्रेटर के रूप में चयनित कृषक उत्पादक संगठन के शेयर होल्डर सदस्य कृषक इस योजना के लाभार्थी होगें।


इसके अतिरिक्त कृषक उत्पादक संगठन (एफ0पी0ओ0) का सोसाइटी एक्ट / कम्पनी एक्ट में इस योजना हेतु चयन की तिथि से कम से कम एक वर्ष पूर्व पंजीकृत होना अनिवार्य होगा तथा एफ0पी0ओ0 के सदस्यों की न्यूनतम संख्या 100 होने पर ही इस योजना का लाभ हेतु पात्र होगा।

     जानकारी देते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि कृषक उत्पादक संगठन (एफ0पी0ओ0) का upfposhakti-com पोर्टल पर पंजीकरण एवं सक्रिय होना अनिवार्य होगा, इसके साथ ही लाभार्थी एफ0पी0ओ0 को बैंक से ए0आई0एफ0 के माध्यम से ऋण प्राप्त किया जाना अनिवार्य होगा तथा एफ0पी0ओ0 को कम से कम 10 प्रतिशत लागत स्वयं वहन करनी होगी जिसमें क्रय किय गये कृषि यंत्रों के सत्यापनोंपरान्त 80 प्रतिशत अनुदान की धनराशि एफ0पी0ओ0 एवं एफ0पी0ओ0 के कृषक सदस्य के बैंक शाखा को भारत सरकार की केडिट लिंक्ड बैंक इण्डेड सब्सिडी के अनुसार क्रियान्वित करने के लिए स्थानान्तरित की जायेगी। जिलाधिकारी ने बताया कि गाइडलाइन के अनुसार ही लाभार्थी एफ0पी0ओ0 को इन-सीटू योजनान्तर्गत कस्टम हायरिंग सेन्टर हेतु परियोजना लागत रू0 30 लाख के निर्धारित कृषि यंत्र जैस ट्रैक्टर 60 एच0पी0 व अधिक, बेलिंग मशीन, स्ट्रा रेक एवं काप रीपर आदि अन्य फसल अवशेष प्रबन्धन वाले कृषि यंत्र क्रय करना अनिवार्य होगा।

अतः जनपद में संचालित / स्थापित एफ0पी0ओ0 अनुदान पर एग्रीग्रेटर के रूप में पराली / फसल अवशेष प्रबन्धन के कृषि यंत्र हेतु इच्छुक लाभार्थी अपना आवेदन पत्र नजदीकी राजकीय कृषि बीज भण्डार / उप सम्भागीय कृषि प्रसार अधिकारी अथवा उप कृषि निदेशक, झॉसी कार्यालय में जमा करें, जिससे गाइड लाइन के अनुसार योजना का लाभ दिया जा सके। जिलाधिकारी श्री अविनाश कुमार ने पुन: जनपद के समस्त कृषक उत्पादक संगठनों को मा0 मुख्यमंत्री जी की मंशा से अवगत कराते हुए अनुरोध किया कि ज्यादा से ज्यादा एफपीओ योजना अंतर्गत आवेदन करना सुनिश्चित करें। ताकि जनपद में पराली की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

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