एसडीएम ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों से की पूंछतांछ, मौके पर जाकर की जांच
बांदा, के एस दुबे । गांवों के विकास के लिए शासन की योजनाओं को संचालित किया जा रहा है, लेकिन प्रधान और सचिव की मिलीभगत से शासन की मंशा को पलीता लगाने का काम किया जा रहा है। इसके चलते गांवों का समग्र विकास नहीं हो पा रहा। सरकारी धन को डकारने का काम सचिव और प्रधान के द्वारा किया जा रहा है। बिना काम कराए ही फर्जी मास्टर रोल तैयार करके लाखों रुपये सरकारी धन हजम किया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला नरैनी ब्लाक क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गजपतिपुर खुर्द का सामने आया है, जिसमें दर्जनों किसानों के खेतों से मेड़बंधी के नाम पर मनरेगा के तहत मिट्टी खुदवा डाली गई और उसका लाखों रुपए का भुगतान भी डकार लिया गया है।
 |
| गांव में पहुंचकर ग्रामीणों से पूछतांछ करते एसडीएम नरैनी सत्यप्रकाश व अन्य |
नरैनी ब्लाक क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत गजपतिपुर खुर्द के किसान शिव भवन पुत्र लक्ष्मी, चुन्नीलाल पुत्र रामगोपाल, सुनील गुप्ता पुत्र भगवानदीन, रामदुलारे साहू ने जिलाधिकारी को बीते 8 अगस्त को हलफिया बयान देकर बताया था कि गांव के ग्राम प्रधान और सचिव द्वारा उनके खेतों से मेडबंधी के नाम पर मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर मिट्टी खुदवा डाली गई और उसका लाखों रुपए फर्जी तौर पर हड़प लिया गया, जबकि नाम मात्र का भी मेडबंधी का कार्य नहीं कराया गया। शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि गांव में देवी जी के पास स्थित मॉडल तालाब अमृत सरोवर के नाम पर खासी धांधली की गई। मानक के हिसाब से कोई खुदाई नहीं की गई। यहां तक कि पुराने घाटों व सीढ़ियों में ही मरहम पट्टी करके औपचारिकता पूरी कर ली गई और लाखों रुपए हड़प लिए गए। ग्रामीणों ने प्रधान और सचिव द्वारा संयुक्त रूप से विकास के नाम पर किए गए फर्जीवाड़ा व शासन के धन का घोटाले की परत दर परत खोलते हुए जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग की। गांव के शिकायतकर्ताओं की शिकायत को जिलाधिकारी ने गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया, जिसमें उप जिलाधिकारी नरैनी सत्यप्रकाश, जिला पूर्ति अधिकारी उबैदुर्रहमान व लघु डाल सिंचाई खंड सहायक अभियंता शामिल रहे और पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए। इस प्रकार जिलाधिकारी के दिशा निर्देश पर उप जिलाधिकारी सत्यप्रकाश व जिला पूर्ति अधिकारी उबैदुर्रहमान जांच के लिए बीते 18 अक्टूबर को ग्राम गजपतिपुर खुर्द पहुंचे, जहां उन्होंने शिकायतकर्ताओं व गांव के अन्य ग्रामीणों से वार्ता कर मामले की हकीकत जानने का प्रयास किया। इसके अलावा दोनों ही अधिकारी स्थलीय निरीक्षण करने के लिए शिकायत कर्ताओं के खेत पहुंचे, जहां से मेडबंदी के नाम पर मिट्टी की खुदाई की गई थी। मौका मुआयना के बाद दोनों अधिकारी वापस लौट आए। देखना यह है कि वह अपनी जांच रिपोर्ट में कितना फर्जीवाड़ा साबित करते हैं।
सचिव ने नहीं दिखाए कागजात
एसडीएम सत्यप्रकाश व जिला पूर्ति अधिकारी उबैदुर्रहमान जांच के लिए जब बीते 18 अक्टूबर को ग्राम गजपतिपुर खुर्द पहुंचे तब जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्होंने गांव के सचिव को बुलाकर कराए गए कार्यों के विवरण के संबंध में जानकारी पूंछी और कार्यपूर्ति के सारे कागजात दिखाने को कहा, लेकिन सचिव मौके पर कोई कागजात नहीं दिखा सका। इस पर उप जिलाधिकारी ने सचिव को सभी कार्यपूर्ति के कागजातो के साथ कार्यालय में हाजिर होने के कड़े आदेश दिए हैं, लेकिन अब तक सचिव द्वारा कोई भी कागजात उप जिलाधिकारी को उपलब्ध नहीं कराया जा सका है।
धांधली में लिपटे गांव के विकास कार्य
ग्राम गजपतिपुर के ग्रामीणाें ने जिलाधिकारी को दिए गए अपने शिकायती पत्र में मुख्य बिंदु फर्जी मेडबंधी का उल्लेख करने के साथ-साथ गांव में कराए गए अनेक कार्यों का भी उल्लेख किया है, जिसमें लाखों की राशि डकार ली गई हैं। इनमें मॉडल तालाब की खुदाई, सीसी रोड का निर्माण, हैंडपंप की मरम्मत, स्कूल में बनाया गया नव निर्मित भोजनालय कक्ष, शौचालय धांधली, स्ट्रीट लाइट आदि शामिल हैं।
No comments:
Post a Comment