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Saturday, October 19, 2024

हीनभावना से की गई खेती होती है घाटे का सौदा : अयोध्या

कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित किया जा रहा दो दिवसीय किसान मेला

कृषि मेला विज्ञान और वैज्ञानिकता के लिए किसान व वैज्ञानिकों का साझा कार्यक्रम : कुलपति

बांदा, के एस दुबे । कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय किसान मेले को संबोधित करते हुए पूर्वराज्यमंत्री अयोध्या सिंह पटेल ने कहा कि आज हम अन्न, दुग्ध, फल, सब्जी और मांस पर आत्मनिर्भर हैं। खेती में कृषि वैज्ञानिकों का योगदान व कुछ कृषक वैज्ञानिकों ने इसे और सुदृढ़ बनाया है। खेती-बारी करने के लिये कभी भी हीनभावना मन में नहीं लाना चाहिए। बिना मन से किये गये खेती बारी हमेशा घाटे का सौदा होता है। आज के समय बहुत से किसान कृषि के क्षेत्र में नया करके दिखाया है, और सीमित संसाधनों एवं कठिनाईयों के बाद भी उत्पादन लेने में सफल हुए हैं। पहले किसान अच्छी सड़कें न होने से अपने उत्पाद को बाजार तक नहीं पहुँचा पाते थे, परन्तु आज ऐसा नहीं है। मुख्य अतिथि श्री पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय विभिन्न फसलों के उन्नतशील प्रजातियों के बीज उपलब्ध करा रहा है यह एक सराहनीह कार्य है। वास्तव में किसान मेले का उद्देश्य किसानों व आदान वितरकों

स्टालों का निरीक्षण करते अयोध्या सिंह पटेल व अन्य

तथा तकनीकी उपलब्ध कराने वाले संस्थाओं के संगम के लिये लागाया जाता है, जिससे अधिक से अधिक कृषक लाभान्वित हो सके। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल ने कहा कि किसानों के पास खेती-बारी से सम्बन्धित अनेक सम्स्यायें हैं। समस्याओं का समाधान कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की ओर से किया जाए। इसके लिए जरूरी है कि किसान व वैज्ञानिक विश्वविद्यालय और प्रक्षेत्र पर संवाद करें। कृषि विश्वविद्यालय इस क्षेत्र के लिये एक गौरव है इसका ज्यादा से ज्यादा लाभ यहां के युवाओं और किसानों को उठाना चाहिए। कम सिंचाई वाली फसलों को लगाकर सिंचाई जल कि समस्या से समाधान पाया जा सकता है। कुलपति
किसान मेले का जायजा लेते डीएम नगेंद्र प्रताप व अन्य

नरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि किसान मेला इस क्षेत्र के किसानों एवं अन्य हित धारकों के लिये एक बड़ा कार्यक्रम है। जिसे शोधोपरान्त क्षेत्रानुकूल तकनीकियों को प्रसारित करने का एक सुगम साधन है, जिसे विश्वविद्यालय अपने संसाधनों से आयोजित करता है। बुन्देलखण्ड के कृषक विश्वविद्यालय द्वारा कृषि के क्षेत्र में किये जा रहे नवाचार को जान सके। इसके लिये वैज्ञानिक, कृषक और आदान वितरक एक प्लेटफार्म पर अपने हित साझा करते हैं। किसान मेला विश्वविद्यालय का एक नियमित कार्यक्रम है जिसे विश्वविद्यालय पिछले कई वर्षों से आयोजित कर रहा है। कृषक, आदान वितरक व सम्मानित जनप्रतिनिधियों का सहयोग मिला तो ऐसे कार्यक्रम विश्वविद्यालय आयोजित करता रहेगा। किसान मेले में केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मकदूम, मथुरा के प्रधान वैज्ञानिक, डा. बी. राय ने बुन्देलखण्डी बकरी इस क्षेत्र के लिये वरदान है ऐसा कहा। बकरी पालन से आजीविका के साथ-साथ किसानों की
किसान मेले को संबोधित करते पूर्व राज्यमंत्री अयोध्या सिंह पटेल

आय में वृद्धि हो रही है इसके कई उदाहरण बताये। डा0 राय ने बताया कि मेले के साथ-साथ केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मकदूम, मथुरा के तत्वावधान में आदिवासी ग्रामीण किसानों एवं महिलाओं को बकरी पालन पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्यान महाविद्यालय के सभागार में किया जा रहा है। जिसमें प्रथम दिवस में मानिकपुर क्षेत्र के ग्राम झरी, ढ़ाडी कोलान, करहुआ व मानिकपुर कल्याण केन्द्र के लगभग 200 किसानों ने प्रशिक्षण में प्रतिभाग किया।प्रसार निदेशालय के निदेशक प्रसार, प्रो. एनके वाजपेयी ने कहा कि किसान मेले में कुल 104 स्टॉल जिसमें सरकारी विभागों, खाद उर्वरक, बीज, पादप रासायन, खाद्य सामग्री हस्त शिल्प आयूर्वेद, कृषि यंत्र एवं मशीनिरी बनाने वाली संस्थाओं व छात्रों ने लगायें हैं। प्रो. बाजपेयी ने बताया कि मेले का समापन रविवार को कृषि, कृषि शिक्षा व अनुसंधान, सूर्य प्रताप शाही द्वारा किया जाना सुनिश्चित है। मेले का उद्घाटन अयोध्या सिंह पटेल ने डीएम नगेन्द्र प्रताप व अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में फीता काटकर व दीप प्रज्जवलित करके किया गया। मेले में बुन्देलखण्ड के सभी 07 जिलों के कृषि विज्ञान केन्द्रों के मार्गदर्शन में लगभग 300-300 किसान एवं युवाओं ने प्रतिभाग किया।

विवि में आयोजित मेले के दौरान मौजूद किसान

डीएम ने स्टालों का किया निरीक्षण

बांदा। कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय किसान मेला का शुभारम्भ डीएम नगेन्द्र प्रताप और अयोध्या सिंह पटेल ने किया। डीएम ने किसान मेले में आयोजित विभिन्न स्टालों का गहनता से निरीक्षण किया। उन्होंने कृषि प्रसार, शोध एवं प्राकृतिक खेती का माॅडल तथा सामुदायिक विकास, केन्द्रीय दलहन अनुसंधान के स्टाल तथा मृदा एवं जल संरक्षण एवं वानकीय माॅडल सहित अन्य स्टालों का निरीक्षण करते हुए प्राकृतिक खेती को बढावा दिये जाने और किसानों को जागरूक करने पर जोर दिया। निरीक्षण के दौरान निदेशक प्रसार डॉ. एनके बाजपेई सहित संयुक्त निदेशक कृषि तथा कृषि विभाग से सम्बन्धित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।


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