मित्रता में अमीरी-गरीबी न देखें: कथा व्यास
मऊ/चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । मऊ डिग्री कॉलेज के सामने चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथा व्यास आचार्य संजय राम शुक्ला ने सुदामा चरित्र व सुखदेव विदाई का वर्णन किया। गुरुवार को कथा व्यास ने कहा कि मित्रता में गरीबी-अमीरी का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। मित्र एक-दूसरे के पूरक होते हैं। भगवान कृष्ण-सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि जब भगवान कृष्ण ने अपने बचपन के मित्र सुदामा की गरीबी को देखा तो वह
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| कथा व्यास संजय राम शुक्ल। |
रोते हुए अपने राजसिंहासन पर बैठे और उलाहना दिया कि जब सुदामा गरीब थे, तब वह अपने मित्र के पास क्यों नहीं आए। सुदामा ने मित्रता को सर्वोपरि मानते हुए श्री कृष्ण से कुछ नहीं मांगा। आचार्य संजय ने कहा कि सुदामा चरित्र जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा देता है। उनकी कथा सुनकर श्रोतागण भाव-विभोर हो गए। इस मौके पर मुख्य यजमान विजय बहादुर, अनारकली, लवकुश, राजू, रामप्रसाद, सुरेश, बालकृष्ण सहित अन्य लोग मौजूद रहे। समापन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।


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