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Wednesday, January 21, 2026

बसन्त पंचमी 23 जनवरी को

माघ मास में शुक्ल पक्ष  की पंचमी को बसन्त पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष पंचमी तिथि का प्रारम्भ  गुरुवार 22 जनवरी की देर रात्रि  02:28  को प्रारम्भ होगी और शुक्रवार 23 जनवरी देर रात्रि 01: 46 को पंचमी तिथि समाप्त होगी, पंचमी तिथि 23 जनवरी को पूरे दिन रहेगी।  वसंत पंचमी पर शुभ योग, चन्द्रमा कुम्भ राशि में प्रात: 08:33 उपरांत मीन राशि में रहेंगे व पूर्वाभादप्रद नक्षत्र दिन में 02 :33 उपरांत उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेंगे । मकर राशि में 4 ग्रह-सूर्य शुक्र, मंगल तथा बुध एक साथ होंगे तथा मंगल अपनी उच्च राशि में विराजमान रहेंगे । रवियोग एवं चन्द्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु के होने से गजकेसरी का शुभ संयोग भी बन रहा है। सरस्वती पूजा मुहूर्त प्रात: 6:18  से दिन 12:18  तक श्रेष्ठ है, बसंत पंचमी अबूझ मुहूर्त है परन्तु इस वर्ष शुक्र के अस्त के चलते इस दिन विवाह और अन्य बड़े मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे.

 


ये पर्व ऋतुराज बसन्त के आने की सूचना देता है। बसंत ऋतु में प्रकृति का सौंदर्य मन को मोहित करता है , माँ सरस्वती को शारदा, वीणावादनी, वाग्देवी, भगवती, वागीश्वरी आदि नामों से जाना जाता है। इनका वाहन हंस है। बसंत पंचमी को देवी सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं  माँ सरस्वती विद्या, गीत-संगीत, ज्ञान एवं कला की  अधिश्ठात्री देवी है। इनको प्रसन्न करके इनके आर्शीवाद से विद्या, ज्ञान, कला प्राप्त किया जा सकता है। बसन्त पंचमी पर श्वेत वस्त्रावृत्ता माँ सरस्वती की प्रातः स्नान कर इनकी पूजा - अर्चना करनी चाहिए। इनके पूजन में दूध, दही, मक्खन, सफेद तिल के लड्डू, गेहँू की बाली, पीले सफेद रंग की मिठाई और पीले सफेद पुष्पों को अर्पण कर सरस्वती के मंत्रों का जाप करना चाहिए। इस दिन पीले वस्त्र पहनने चाहिए और पीले रंग की खाद्य सामग्री के अधिकाधिक सेवन की भी परम्परा है। बसन्त पंचमी के दिन किसान लोग नये अन्न में गुड़-धृत मिश्रित करके अग्नि तथा पितृ- तर्पण करते है 

- ज्योतिषाचार्य एस.एस.नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ

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