कानपुर नगर, हरिओम गुप्ता - फू्रड केमिस्ट्री, प्रोसेस्ड फूड और टाॅक्सिकोलाॅजी जैसे गंभीर विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन डीएवी काॅलेज के रसायन विभाग द्वारा आयोजित किया गया जिसमें प्राचार्य ने कहा आज के परिवेश में रोजमर्रा में प्रयोग किये जाने वाले उत्पादों में मिलावट के कितने रूप हो सकते है यह जानकारी हम स्तब्ध है और यह स्वस्थ्य भारत मिशन के लिए बाधा है, इस विषय पर यह संगोष्ठी काफी महत्वपूर्ण
है। डा0 डीपी राव ने कहा कि किसी वस्तु के प्राकृतिक तथा अनुमोदित रूप में फेरबदल करना मिलवट के दायरे में आता है। भारत में मिलावट पर कई सख्त कानून है लेकिन अभी और सुधार अपेक्षित है। मुख्य अतिथि डा0 शकुंतला मिश्रा, राष्ट्रीय पुनर्वास विश्विधालय कुलपति प्रो0 आरकेपी सिंह ने कहा कि मिलावट पर बने कानूों का मुख्य उददेश्य उपभोक्ताओं को धोखाधडी और ठगी से बचाते हुएखाद पदार्थो की शुद्धता एवं समग्रता सुनिश्ति करना है। गौरवेंद्र स्वरूप ने कहा जानकारी ही बचाव है, ऐेस विषय पर संगोष्ठी पर उन्होने बधाई दी। एनएसआई कानपुर प्रो0 नरेन्द्र मोहन ने कहा चने तथा अरहर की दाल में खेसारी कि मिलावट शरीर में लजकवा का कारण बनती है। वनस्पति तेलेां में मिनरल आयल की मिलावट से कैंसर हो सकता है। वैक्स कोटिंग सब्जियों में हर्मोन के इंजेक्शन, सिंथेटिक रंल, मिठाइियों में रोदमिनी-बी, हल्दी में क्रोमेट की जानकारी मिलवट के जहर की एक झकल है। प्रो0 कमान ंिसह ने कहा देसी घी में डालडा, दूध में पानी, दाल में कंकड, काली मिर्च में पपीते के बीच, धनिया पाउडन में घोडे की लीद मिलायी जाती है। अंत में विभागाध्यक्ष डा0 सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने सभी का आभार व्यक्त किया तथा आशा व्यक्त की कि संगोष्ठी में उपस्थित सभी लोग जन जागरूकता के माध्यम से इस समस्या के उन्मूलन में सहयोग करेगे, जिससे स्वस्थ भारत की परिकल्पना को मूर्तरूप मिल सके। डा0 राजुल सक्सेना ने आभार व्यक्त किया तथा संचालन अमर श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर रसायन विभाग के सभी शिक्षक, तृतीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व अन्य विभागों के शिक्षक व शिक्षिकाओ के साथ बडी संख्या में छात्र-छात्रायें मौजूद रहे।

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