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Sunday, May 10, 2020

मदर्स डे: बेटियों की खातिर मुम्बई से बनारस के सफर पर स्कूटी से निकली मां

दर दर भटककर प्रवासी श्रमिक परिवार ने हाइवे पर मनाया मदर्स डे
मां की ममता के आगे फीकी पड़ी मदर्स डे की खुशियां
 
फतेहपुर, शमशाद खान । बेटियां भगवान के रूप होती है। एक बेटी के कांधे पर जब बहु, पत्नी और माँ की जिम्मेदारी आ जाती है तो वह पहले की अपेक्षा उम्मीदों पर कहीं अधिक खरी उतरती है। ऐसा ही एक माँ के रूप रेखा यादव में देखने को मिला। जो लॉकडाउन के दौरान अपनी बेटियों व परिवार को लेकर मुम्बई से बनारस का सफर तय कर रही है। रेखा यादव व उनका परिवार मुम्बई में ही रहता है। पति प्राइवेट नौकरी करते है। लॉकडाउन के दौरान काम धंधे बन्द हो जाने से परिवार के सामने खाने पीने का संकट बन गया तो परिवार परेशान हो गया। मां रेखा से यह देखा नहीं गया तो परिवार मोहल्ले में ही रहने वाले भदोही जनपद के पड़ोसियो के साथ तीन दोपहिया वाहनों के साथ गांव के सफर पर निकल पड़ी। पंद्रह सौ किलोमीटर से ऊपर की दूरी स्कूटी से तय करना पहाड़ के बराबर था लेकिन एक तरफ भुखमरी से परेशान परिवार को देखकर मां रेखा ने हिम्मत नहीं हारी और पति चन्द्रशेखर यादव के
हाईवे पर रूक कर मां को गले लगाकर मदर्स डे की बधाई देतीं बेटियां। 
साथ बड़ी बेटी काजल यादव व छोटी बेटी बेबी यादव सफर पर न केवल निकलने की हिम्मत दिलाई बल्कि एक स्कूटी पर खुद हेलमेट लगाकर सवार होकर भूख से लड़ने के लिये पंद्रह सौ किलोमीटर का सफर तय करने पर निकल पड़ी। जबकि दूसरी बाइक पति चंद्रशेखर ने संभाली और निकल पड़े अनजान रास्तों पर। कुछ दूरी बेटी काजल और बेबी चलाती तो कभी रेखा खुद। इसी तरह साथ अन्य तीन बाइकों पर सवार आठ लोगों का काफिला धीरे धीरे कई राज्यों को पार कर जनपद पहुंचा तो मदर्स-डे पर बेटियों ने वीरांगना मां से लिपट कर उन्हें मदर्स डे की बधाई देते हुए उन्हें गले लगाकर दुनिया की सबसे अच्छी मां बताया। बेटी काजल व बेबी ने बताया कि लॉकडाउन के कारण परिवार भुखमरी की कगार पर आ गया था। गांव वापस जाना ही एकमात्र रास्ता था। मुम्बई से वाराणसी तक का सफर तय करने के लिये कोई साधन नहीं था। मां की दिलाई हिम्मत के बल पर हम सब दो पहिया वाहन से निकले। हमारे साथ मां ने स्कूटी चलाकर सफर को आसान कर दिया। मदर्स डे पर बच्चे अपनी माँ को तोहफे देते है लेकिन बच्चो को परेशानी से बचाकर मां ने साबित कर दिया कि बच्चों के लिये भले ही मदर्स डे खास डेट को होता हो लेकिन एक माँ के लिये तो हमेशा मदर्स डे रहता है।

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