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Friday, June 26, 2020

प्लाट के कब्जे की जंग में निर्दोष मजदूरों पर पुलिस की गाज

सत्ता पक्ष व समर्थित दल का मामला होने पर पुलिस के हाथ पैर फूले
गरीब मजदूरों के पास वकीलों को देने के पैसे तक नहीं

फतेहपुर, शमशाद खान । प्लाट के एक टुकड़े को लेकर सत्ता पक्ष के विधायक के नजदीकी व सत्ता के सहयोगी दल के सदस्य के बीच वर्चस्व की जंग के बीच पुलिस व प्रशासन चक्की के दो पाटों के बीच पिसता हुआ नजर आ रहा है। अपनी नाकामी को छिपाने के लिये प्रशासन द्वारा निर्दोषों को ही निशाना बनाया जा रहा है। पुलिस की रोक के बाद भी भवन का कार्य जारी रहने पर निर्माण को रोकने पहुंची पुलिस को देखकर निर्माण कार्य करवा रहे लोग चंपत हो गये तो पुलिस ने कार्य मे लगे मजदूरों को ही पकड़ कर शांतिभंग में चालान कर दिया। 
शहर के चित्रांश नगर स्थित सीपीएस स्कूल के निकट स्थित एक प्लाट पर लोजपा नेता धर्मेंद्र मिश्रा व पिंटू सिंह के बीच मालिकाना हक को लेकर अपने अपने दावे किये जा रहे है। धर्मेंद्र मिश्रा जहाँ अपनी पत्नी के नाम बैनामा होने व मामले को न्यायालय में विचाराधीन बता रहे है जबकि पिंटू सिंह द्वारा इसे बांदा निवासी सरोज देवी का बताते हुए इसे अपना कह रहे है। पिंटू सिंह सत्ता पक्ष के एक माननीय के नजदीकी बताये जाते है। मामला सत्ता पक्ष व
कचेहरी चौकी के बाहर बैठे मजदूर।
सहयोगी दलों के नेताओ का होने के कारण पुलिस भी मामले से पलड़ा झाड़ रही है। शुक्रवार को पिंटू सिंह की ओर से प्लाट पर निर्माण किये जाने की जानकारी मिलने पर सदर कोतवाल रवींद्र श्रीवास्तव के नेतृत्व में पहुंचे पुलिस बल को देखकर निर्माण करवा रहे लोग मौके से भाग निकले जबकि निर्माण कार्य मे लगे हुए पांच श्रमिको को कोतवाली पुलिस अपने साथ ले आयी। बड़ी मछलियों को पकड़ने में पीछे हट जाने वाली पुलिस पेट की आग बुझाने की खातिर मात्र साढ़े तीन सौ रुपये दिहाड़ी पाने वाले मजदूरों पर बेहद सख्त नजर आयी और आनन फानन मजदूरों पर शांति भंग की कार्रवाई करते हुए न्यायालय के लिये भेज दिया गया। पुलिसिया कार्रवाई का शिकार हुए इन मजदूरों का आखिर क्या दोष था। लॉकडाउन के कारण काम धंधा बन्द होने के कारण रोटी के निवालो को तरस रहे श्रमिको के पास मजदूरी करने के अलावा कोई विकल्प न होने के बाद भी पुलिस द्वारा जबरन निर्माण कार्य करवा रहे मालिको एव निर्माण करवाने वालो पर कार्रवाई न करते हुए दैनिक मजदूरी करने वाले दिहाड़ी मजदूरों पर कार्रवाई किया जाना समझ से परे हैं। कार्रवाई का शिकार हुए मजदूरों धर्मेंद्र सिंह पुत्र राम सजीवन, भोला पुत्र श्रीराम, सर्वेश पुत्र सुंदर, रामजीत पुत्र दैनीवाल, दीपू पुत्र राम किशोर ने बताया कि रोज की तरह मजदूरी करने के लिये सभी लोग मंडी आये थे जहां से हमे निर्माण कार्य के लिये तीन सौ पचास रुपये प्रतिदिन देने के नाम पर बुलाया गया था। कार्य चल रहा था तभी पुलिस कर्मियों द्वारा पुलिस चैकी लाकर कार्रवाही की गयी। उन्होंने बताया कि हम सभी गरीब परिवार से आते है हमारे पास न तो जमानत के लिये वकील की फीस देने को पैसे है और न ही जमानत के लिये कोई सम्पत्ति। निर्दोष मजदूरों पर पुलिस द्वारा की गयी इस कार्यवाही की चारो ओर निंदा की जा रही है।

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