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Friday, June 26, 2020

सरकार को करोड़ों की चपत लगा रहे साईंपुर और वियावल घाट संचालक

खनिज विभाग की मिलीभगत से हो रहा लाल बालू का काला कारोबार

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। लाल बालू के काले कारोबार में जितना बड़ा फेरबदल यहां खनिज विभाग और खदान संचालकों के बीच किया जा रहा है उसे जान दांतो तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाएंगे। रोजाना लाखों की कमाई कराने वाले जिले की एक नहीं बल्कि दो बालू खदानों का सीमांकन नहीं कराया जा रहा और तो और एक खदान संचालक ने तो किस्त बचाने के चक्कर में पूरे खनिज विभाग को ही भ्रमित कर दिया। इस कारगुजारी के तहत खदान संचालक ने अपनी ही खदान का गाटा संख्या ही गलत भेज दिया। यह सब कुछ योजना के तहत विभागीय मिलीभगत से किया गया है। जिसके जरिए सरकार को सीधे तौर पर लगभग 10 करोड़ के राजस्व की चपत लगाई गई आपको बता दें कि बालू खदान के अंतिम दौर में बागेन नदी में बालू खनन कराने वाले पट्टा संचालक जायज नाजायज सब कुछ
करने पर आमादा हैं।30 जून से बंद होने वाले बालू खनन को लेकर खदान संचालक ज्यादा कमाई के चक्कर में ना केवल खनन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं बल्कि सरकार को राजस्व की तगड़ी चोट पहुंचा रहे हैं।इसका जीता जागता उदाहरण जिले की दो बालू खदान साईंपुर और बियावल हैं. एक तरफ खनिज निर्देशक डॉ रोशन जैकब खदान संचालकों पर नियमों का कड़ा चाबुक चला रहे हैं तो दूसरी ओर खनिज अधिकारी उन्हें बरगला कर ना केवल खुद मोटा मुनाफा कमा रहा है बल्की खदान संचालकों को भी मालामाल कर रहा है।इस संबंध में जब खनिज अधिकारी से बात करनी चाही तो हमेशा की तरह उन्होंने फोन रिसीव भी करना उचित नहीं समझा।

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