देवेश प्रताप सिंह राठौर
( वरिष्ठ पत्रकार)
..... .......आज हम सब एक बात से हमेशा दुखी रहते हैं कौन सही है कौन गलत है किस पर विश्वास करें और कहाँ तक विश्वास इस बात को कोई कैसे समझा सकता है..ये शब्दों का विषय नहीं ये इंसान की अनुभूति है जिसे सिर्फ इंसान महसूस कर सकता है रखने के बाद दिल में कभी भी कोई खरास ना हो मैंने ये न किया होता तो अच्छा होता ये मन से निकल दो उसी का नाम है विश्वास जो कदम उठ गया तो उठ गया आपका भरोसा ही आपका भगवान है।जहां शक अपना कदम न रख सके जहां किसी सबूत की जरूरत न पड़े। जंहा कोई डर ना हो जंहा कोई बंधन न हो फिर भी वो दृढ़ रहे वो सिर्फ और सिर्फ सच्चा विश्वास होता है। सही रूप में विश्वास उसी को कहते है। विश्वास कोई फूल की तरह नहीं जो आज खिले कल मुरझा जाये विश्वास तो उस खुशबू की तरह है जिसका कोई मालिक नहीं होता कोई उसे कैद नहीं कर सकता सच्चे विश्वास को जितना तोड़ने की कोशिश की जाये वो उतना ही दृढ होता जाये।आज बहुत-से लोग विश्वास के बारे में नहीं समझते क्योंकि उन्हें लगता है कि विश्वास का मतलब है किसी बात को यूँ ही सच मान लेना, फिर चाहे उसका कोई सबूत न भी हो। मगर विश्वास का यह मतलब नहीं है कि आँख मूँदकर किसी बात पर यकीन कर लेना, क्योंकि ऐसा करना खतरनाक होता है। न ही विश्वास बस मन में उठनेवाली कोई भावना है, क्योंकि यह आसानी से मिट भी सकती है। अगर सच्चा विश्वास न हो तो जीवन में आप किसी इंसान पे विश्वास कर सके या न करे पर अगर आप भगवान पे सच्चा विश्वास करंगे तो याद रहे वो कभी उस विश्वास को टूटने नहीं देते।सच्चा विश्वास बिलकुल अलग है। विश्वास में ऐसी दो बातें शामिल हैं जिन्हें हम अपनी आँखों से नहीं देख सकते। एक, वे असलियतें जो “दिखायी नहीं देतीं,” यानी वह सब जो सच में है। जैसे भगवान दूसरी, विश्वास का मतलब है “आशा की हुई बातों” पर ध्यान देना, यानी उन घटनाओं पर जो अभी तक नहीं घटी हैं। सच्चा विश्वास ठोस सबूतों पर आधारित होता है। जब उसने कहा कि विश्वास का मतलब “पूरे भरोसे के साथ इंतज़ार करना है” उसी तरह अगर हममें सच्चा विश्वास है तो यह ऐसा है मानो हम जिन बातों पर विश्वास करते हैं उन्हें हम देख चुके हैं।सच्चे विश्वास का मतलब पक्का भरोसा और यकीन है।हमें विश्वास को भी मज़बूत बनाए रखने की ज़रूरत है।विश्वास एक जीवन के लिए बहुत बड़ी परीक्षा होती है और एक पहचान है जिसके पास विश्वास है वह हर मुसीबत से पार हो सकता है आज विश्वास इंसान के बीच में एक रिश्ता बनाता है एक भरोसा पैदा करता है एक आशा को पैदा करता है जो जीवन जीने में लाभदायक है और विश्वास के बिना इंसान का जीवन अधूरा है वह हर वस्तुओं पर विश्वास करता है हर लोगों पर विश्वास करता है हर रिश्तेदारों पर विश्वास करता है लेकिन इन सब पर विश्वास करने से हमें कुछ नहीं मिलता है। फिर भी जो विश्वास के पात्र है उसपे विश्वास करे।किन एक अदृश्य शक्ति भी है जो भक्तो और संतो के लिए दृश्य है। जिसे हम सभी ईश्वर कहते है। जिस पर हम विश्वास करें तो हमारा जीवन सफल होता है और हम एक अध्यात्म जीवन मिलता है। जंहा आप दुनिया के सरे काम करते हुए भी भगवान को नहीं भूलेंगे। भगवान पर विश्वास करना बहुत गर्व की बात है और विश्वास हमारे जीवन को पवित्र और मजबूत करता है।अंत में एक बात जो बहुत जरुरी है वो बताना है। विश्वास की शक्ति को पहचानिये खुद पे किया गया विश्वास ही हमारे अंदर बैठे खुदा को जगा देता है। याद रखे अगर वो जाग गए तो इस दुनिया में कुछ भी नमुमकिन नहीं है।आजकल हमारे आस पास विश्वास की बहुत ज्यादा कमी होती जा रही है। एक दूसरे को देखना बंद कीजिये आप खुद ही ऐसे बन जाये की लोग आपकी मिशाल दे। आप देख रहे हैं आज के हालात किस तरह से इस पर विश्वास किया जाए कि जैसा गद्दार देश आज किन हालात में पूरा विश्व है फिर भी चाइना इतने बड़े संकट की जढ़ बना हुआ है। लाखों की संख्या में लोगों की मृत्यु हो चुकी है करोना वायरस के कारण पूरा भी करो ना वायरस चपेट में आ गया है। बहुत से लोग सत्य विश्वास की बात करते हैं परंतु विश्वास क्या होता है इसको सही तरीके से ज्ञान नहीं है। ज्ञान के अभाव में व्यक्ति को अगर किसी पद दे दिया जाए तो वह उस पद का दुरुपयोग करता है ऊपर से विश्वास प्राप्त करके और संस्था का विश्वास बनाने का नाटक करता है और उसके बाद अपने धन कमाने के जरिए को अपना मिशन बनाकर उस संस्था में काम करता है जो विश्वास वरिष्ठ ओं का प्राप्त होता है और वरिष्ठ खुद अपने वरिष्ठ से विश्वास पाकर विश्वासी होने के फल में पद पाया ,है। वह विश्वासी फिर आगे वाले वरिष्ठ के साथ विश्वास बनाकर उससे बड़ा पद पाया है जहां पर चमचों चापलूसी गद्दारों को पद पर बैठा दिया खोलो पद में इतने अंधे हो जाते हैं कि किसी का सम्मान करना उनके संस्कारों में ना के बराबर है। विश्वास वह चीज है जो जेहन में इंसान के जब आती है विश्वास ही जीवन है और विश्वास के साथ विश्वासघात किया जाए वह अभिमन्यु है जिस तरह कौरबो ने अभिमन्यु को नियम तोड़ के विश्वासघात के साथ मार डाला था। उसके बाद महाभारत में सारे नियम कानून सब बदल गए। रामायण हो, या कंस का अत्याचार हो सभी अदरमियों का अंत कैसे हुआ वह आप सभी ने देखा धर्म जो होता है वह आस्था का प्रतीक होता है जिस पर हम विश्वास करते हैं। अधर्म जो होता है वह विश्वास में लेकर विश्वासघात करता है। लोग ऐसे हैं चोर से कहेंगे चोरी करो साहूकार से कहेगे जागते रहो। यह दोहरे चरित्र वाले व्यक्ति कुछ समय के लिए तो सफल हो जाते हैं लेकिन अंत उनका बहुत खराब होता है यह इतिहास गवाह है।


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