मिट्टी गठिया बात की दवा
हमीरपुर, महेश अवस्थी । मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर माता भुंइयारानी मंदिर में अंतिम रविवार को भीड़ तो रही पर शायद उतनी नहीं रही, जो पिछले वर्षों में रही है। इस बार दूसरे प्रदेशों के लोगों का आना नहीं हो पाया ,फिर भी माता के भक्तों ने मां भुनेश्वरी प्रांगण में आकर दरबार में माथा टेका। कुरारा क्षेत्र के आसपास के ग्रामीणों ने माता के दरबार में पहुंचकर हाजिरी लगाई ।महिलाओं ने वही भुवनेश्वरी प्रांगण के आसपास ही गोबर के उपले से सिके हुए टिक्कर, गुड़ के साथ खाए। यहां के पुजारी कालका प्रसाद प्रजापति व राम मनोहर प्रजापति बताते हैं पिछले वर्षों की भांति इस बार मंदिर में बहुत कम लोगों का आगमन हुआ है।
भुवनेश्वरी मंदिर में ही हमेशा से भक्तों के लिए प्रसाद की दुकान रखने वाले अरुण शिवहरे बताते हैं पहली बार ऐसा हुआ है ।जब भुनेश्वरी मंदिर में आषाढ़ के मेले में लगने वाली भारी भीड़ में बहुत ज्यादा मात्रा में कमी आई है। आपको बताते चलें मां भुवनेश्वरी मंदिर का ऐसा प्रताप है कि यहां गठिया बात से पीड़ित व्यक्ति अगर मंदिर का परिक्रमा कर ले, माता रानी के दरबार में माथा टेक दे ,तो निश्चित ही उसे आराम मिलेगा ,ऐसा लोगों की आस्था विश्वास है। भुनेश्वरी मंदिर में पूजन का कार्य कुम्हार जाति के लोग ही सदियों से करते चले आ रहे हैं। झलोखर गांव के ही सत्येंद्र अग्रवाल व राकेश शर्मा बताते हैं मंदिर से सटे हुए तालाब में स्नान करने का विशेष महत्व है ,लेकिन गंदगी के कारण अब इस तालाब में कोर्इ स्नान नहीं करता है ,क्योंकि पूरे गांव की गंदी नाली का पानी इस तालाब में ही आकर समा जाता है। जिससे जल प्रदूषित है।लोग मंदिर की मिट्टी को लगाकर काम चलते है।गजेटियर हमीरपुर में कंनिघम ने लिखा है कि मिट्टी में पारा व सल्फर के अयस्क पाए जाते है ।जो गठिया बात के लिए लाभकारी है।


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