बांदा के लाल के गांव में पसरा मातमी सन्नाटा
कानपुर के बिल्हौर में सीओ के पद पर तैनात थे
बांदा, के0 एस0 दुबे । कानपुर में मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए पुलिस कर्मियों में बांदा का लाल सहेवा गांव निवासी सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्र भी शामिल हैं। उनके शहीद होने की खबर मिलते ही न सिर्फ परिजन बिलख उठे बल्कि पूरा सहेवा गांव सन्नाटे में डूब गया। शुक्रवार को शहीद देवेंद्र के घर में सन्नाटे का आलम था, वहीं पूरे गांव में भी अजीब सा सन्नाटा नजर आया। गांव के लोग अपने लाल के अंतिम दर्शन के लिए बेचैन दिखे।
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| सहेवा गांव स्थित देवेंद्र मिश्र के आवास में पसरा सन्नाटा |
गिरवां थाना क्षेत्र के सहेवा गांव में जन्मे देवेंद्र मिश्र की पहचान एक अच्छे पुलिस अफसर के रूप में थी। गुरुवार की रात को वह अपनी पुलिस टीम के साथ कुख्यात अपराधी विकास दुबे के घर बिकरू गांव छापा मारने गए थे। अभी वह दरवाजे पर ही पहुंचे थे कि कुख्यात अपराधी की ओर से की गई ताबड़तोड़ फायरिंग में सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्र शहीद हो गए। उनके साथ अन्य पुलिस कर्मी भी शहीद हुए हैं। देवंेद्र मिश्र के शहीद होने की खबर जैसे ही सहेवा गांव पहुंची तो परिवार में मानो कोहराम मच गया। सूचना मिलने के तत्काल बाद देवेंद्र के परिजन कानपुर के लिए रवाना हो गए। इधर, शुक्रवार को देवेंद्र के गांव में मातमी सन्नाटा पसरा नजर आया। गांव के लोगों को इंतजार इस बात का है कि देवेंद्र का पार्थिव शरीर कब गांव आएगा और वह उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे। मालुम हो कि सहेवा गांव निवासी देवेंद्र 2015 बैच के पीपीएस अफसर थे। 1980 में दरोगा बने। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी के साथ निर्वहन किया। इसके बाद 2007 में उनका प्रमोशन हुआ और वह इंसपेक्टर बने। वर्ष 2016 में उनका प्रमोशन हुआ और पुलिस क्षेत्राधिकारी पद की जिम्मेदारी उन्हें पहली बार गाजियाबाद इलाके में मिली। इसके बाद उनका तबादला कानपुर के बिल्हौर तहसील में सीओ के तौर पर हुआ। सीओ के तौर पर काम कर रहे देवेंद्र मिश्र आगामी नौ महीनों में रिटायर होने वाले थे। संभव था कि बिल्हौर से ही उनका रिटायरमेंट होता। रिटायरमेंट के बाद सुकून भरा जीवन अपने बच्चों और परिवार के साथ बिताने का सपना देवेंद्र ने संजोया था, लेकिन अफसोस कि ऊपर वाले को कुछ और ही मंजूर था। देवेंद्र गुरुवार की रात को कानपुर के बिकरू में भुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए।
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| शहीद सीओ देवेंद्र मिश्र (फाइल फोटो) |
पत्नी और दो बेटियां छोड़ गए देवेंद्र
बांदा। कानपुर में मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए देवेंद्र अपने पीछे पत्नी आस्था और दो बेटियां छोड़ गए हैं। देवेंद्र की मौत के बाद सभी बदहवास हालत में हैं। देवेंद्र की बड़ी बेटी वैष्णवी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही है और छोटी बेटी वैशारदी 12वीं की छात्रा है। देवेंद्र की मौत के बाद अब इन बच्चियों का भविष्य क्या होगा यह तो भविष्य के गर्त में है। अलबत्ता मुख्यमंत्री की ओर से हर संभव मदद उपलब्ध कराए जाने का वायदा किया गया है। देवेंद्र के भाई राजीव मिश्रा डाक विभाग में हैं। जबकि आरडी मिश्र सहेवा गांव के पूर्व प्रधान बताए गए हैं।
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