दीनदयाल शोध संस्थान ने राष्ट्रीय वेबीनार में हुआ चिंतन
देशभर से 743 प्रतिभागियों की रही मौजूदगी
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। विवाद समाप्त करने का मूल मंत्र है, लोगों में आपसी भाईचारे को कायम करना और उनमें आपसी विश्वास पैदा करना। ग्रामीण बहुत अधिक संवेदनशील होते हैं। उनका स्वभाव थोड़ा अलग होता है। छोटी-छोटी बात पर नाराज और खुश हो जाते हैं, परंतु संवेदना और विश्वास उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। उनके इस दोनों पहलुओं को सही दिशा में लाने का काम किया जाए तो नतीजा अनुकूल आ सकता है। इस सबके लिए आपस में संवाद बहुत महत्वपूर्ण है। जब हमारे गांव विवाद मुक्त होंगे तो निश्चित तौर पर समरस समाज की ओर भी हम अग्रसर होंगे।
यह बात दीनदयाल शोध संस्थान के तत्वावधान में आयोजित विवाद मुक्त गांव पर आयोजित राष्ट्रीय वेबीनार में वक्ताओं ने रखें। मुख्य अतिथि नेशनल ग्रीन टिव्यूनल के चेयरमैन व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल एवं भारत सरकार के पूर्व एडीशनल साॅलिसीटर जनरल प्रयागराज अशोक मेहता, कनेरी मठ कोल्हापुर के स्वामी सिद्धेश्वर महाराज, दिल्ली पुलिस के पूर्व विशेष आयुक्त दीपक मिश्रा, मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव जबलपुर, दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव अतुल जैन, संगठन सचिव अभय महाजन, प्रबंध मंडल के
सदस्य बसंत पंडित, राम दर्शन चित्रकूट प्रभारी वीरेंद्र सिंह, महाप्रबंधक अमिताभ वशिष्ठ, प्रमुख रुप से उपस्थित रहे। राष्ट्रीय वेबीनार का संयोजन महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव ने किया। एनजीटी के चेयरमैन आदर्श कुमार गोयल ने नानाजी के विवाद मुक्त गांव कांसेप्ट के बारे में बताते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम साहब कहा करते थे कि नानाजी देशमुख के विवाद मुक्त गांवों के कांसेप्ट को प्रयास में लाना चाहिए। उन्होंने बताया कि विवाद का मुख्य कारण है पेंडिंग कोर्ट केसेस। आज भी कोर्ट में 10 से 20 साल पुराने केसेस पेंडिंग है। केस पेंडिंग होने के कारण लोग विवादित व अवैध तरीके अपनाने लगते हैं। उन्होंने इसके लिए मौजूदा न्याय व्यवस्था को मॉडिफाई करने की बात भी कही। उन्होंने बताया कि नानाजी का गांवों को विवाद मुक्त बनाने का सफल प्रयास रहा, क्योंकि नानाजी का ऐसा व्यक्तित्व था कि दोनों पक्ष उनकी बात मानते थे। दिल्ली पुलिस के पूर्व विशेष आयुक्त दीपक मिश्रा ने कहा कि विकास के साथ विकारों का निर्माण भी होता है। इसीलिए विकास में ध्यान देना चाहिए, विकारों को नहीं। विकार से विवाद उत्पन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की मानसिकता में परिवर्तन आना चाहिए। ऐसा आदमी चाहिए जो दोनों पक्षों की सुने। ताकि विवाद की स्थिति उत्पन्न ही न हो। भारत सरकार के पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अशोक मेहता ने बताया कि शंका व भेद तो हमेशा से ही समाज का एक अंग रहा है, परंतु याद रहे कि इस दौरान संवाद का क्रम न टूटे। उन्होंने कहा कि संवाद को स्थापित करना चाहिए विवाद को नहीं, क्योंकि अगर विवाद को दूर नहीं किया जाए तो क्रोध व विरोध बढ़ता है। अपने साथ-साथ दूसरों के हित की चिंता करना भी दायित्व रहे। दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ताओं के प्रयासों से पीढ़ियों से कायम इन विवादों को सुलझा कर दो परिवारों को जोड़ने के कई काम किए गए, यह बहुत ही अनुकरणीय है। कनेरी मठ के स्वामी सिद्धेश्वर ने बताया कि विवाद मुक्त गांव के साथ-साथ हमें व्यसन मुक्त गांव, प्रदूषण मुक्त गांव, निर्मल गांव की भी परिकल्पना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर गांव विवाद मुक्त होंगे तो गांव अधिक खुशहाल हरे-भरे व समृद्ध होंगे। राष्ट्रीय वेबीनार में देश भर से 743 प्रतिभागियों की भागीदार रही।
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| वेबीनार में व्याख्यान देते वक्ता। |


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