हमीरपुर, महेश अवस्थी । यमुना नदी के किनारे दो हजार साल पुराने मंदिर में सावन के महीने में दूर दूर से श्रद्धालु दर्शन करने आते है ।गुप्त कालीन इस मंदिर का जिर्डोधार 40 साल पहले कराया गया था ।यमुना नदी कि बाढ़ से मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया था।मगर मंदिर के गर्भ गृह से मिली मूर्तियों,मिट्टी के बर्तन ने इसकी पहचान बना दी ।पुरातत्व वेत्ता अयंगर ने जांच कर मंदिर को गुप्त काल का बताया ।मंदिर में गर्भ गृह में जाने के लिए 10 सीढी उतरकर जाना पड़ता था।मंदिर चूने के गारे से बनाया गया था। पकी मिट्टी की बनी रामायण व महाभारत की घटनाओं से संबंधित मूर्तियों को चोर कार के जरिये चुरा ले गए थे ।जिसका आज तक पता नही चला। बलुए पत्थर से बने भोलेनाथ व माँ पार्वती के लिंग पूजन के लिए श्रद्धालु पड़ोसी जनपदों से बड़ी संखया में आते है ।इस ऐतिहासिक शिव मंदिर में कभी नारायन दास,सूरज दास महत्वपूर्ण सन्त रहते थे।जो अब गोलोक वासी हो गए है।मान मनौती पूरी होने पर श्रद्धालु भोले नाथ को श्रद्धा सुमन अर्पित करने नंगे पैर व जमीन में लेटकर आते है।सावन में मंदिर में महिलाएं यमुना नदी में स्नान कर भीगे कपड़ो में गीत गाते हुए मंदिर पूजन करने आती है ।ऐसी मान्यता है कि भोलेनाथ इससे जल्दी प्रसन्न हो जाते है ।मंदिर परिसर के बाहर मेले जैसा नजारा देखने को मिलता है।महंत सतीश दास का कहना है कि मंदिर व भोले नाथ कि छवि विलक्षण है ,भक्तो की मनोकामना भोले नाथ तुरन्त पूरी करते है । संग महेश्वर नाम से मन्दिर को जाना जाता है। जिसे पुरातत्व विभाग ने अधिग्रहित कर लिया है ।
Thursday, July 16, 2020
भक्तो को क्या नही देते संगमहेश्वर बाबा
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