3 से 5 वर्ष तक के बच्चों के लिए होगा अतिरिक्त सत्र का आयोजन
हर बच्चे को अलग चम्मच से पिलाई जाएगी दवा
बांदा, के एस दुबे । बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और उनमें विटामिन-ए की कमी को पूरा करने के उद्देश्य से जनपद में आज गुरुवार से बाल स्वास्थ्य पोषण माह की शुरुआत की गई। जिलाधिकारी अमित बंसल ने जिला अस्पताल स्थित पीपीसी पर उपस्थित बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाकार अभियान का शुभारम्भ किया। अभियान 13 सितम्बर तक चलेगा जिसके तहत नौ माह से पांच वर्ष तक के 2.27 लाख बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाई जाएगी।
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| सीएमओ डा. संतोष कुमार को निर्देशित करते जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल |
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग और बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के सहयोग से बाल स्वास्थ्य पोषण माह प्रतिवर्ष दो चरणों में आयोजित किया जाता है। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते अभियान के दौरान कोविड-19 प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाएगा। प्रत्येक बच्चे को दवा पिलाने से पहले एएनएम अपने हाथों को सैनिटाइज करेंगी और उचित दूरी रखते हुए हर बच्चे को दवा पिलाएंगी। हर बच्चे को अलग चम्मच से दवा पिलाई जाएगी। कोविड-19 को देखते हुए भीड़ से बचने के लिए अतिरिक्त सत्र लगाए जाएँगे। नौ माह से तीन वर्ष तक के बच्चों को बुधवार और शनिवार को आयोजित सत्रों में दवा पिलाई जाएगी। जबकि तीन से पांच वर्ष तक के बच्चों के लिए गुरुवार और सोमवार को अतिरिक्त सत्र लगाए जाएंगे। इस अवसर पर जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सम्पूर्णानन्द मिश्रा, आरआई एआरओ राधा शर्मा, विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. संतोष गुप्ता, यूनिसेफ के जिला मोबिलाइजेशन समन्वयक फुजैल ए सिद्दिकी, पीपीसी स्टाफ आदि मौजूद रहे।
इनसेट
बहुमूल्य निमोनिया का टीका अब लगेगा मुफ्त
बांदा। बाल स्वास्थ्य पोषण माह की शुरुआत के साथ ही गुरुवार को जनपद में न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (पीसीवी) यानि निमोनिया का टीका भी लांच किया गया। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत अब से यह टीका बच्चों को मुफ्त लगाया जाएगा। पहली डोज डेढ़ माह पर, दूसरी साढ़े तीन माह पर और तीसरी बूस्टर डोज नौवें माह में दी जाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्विलांस मेडिकल आफिसर डा. संतोष गुप्ता ने बताया कि अब तक यह टीका केवल प्राइवेट अस्पतालों में उपलब्ध था जिसकी एक डोज की कीमत दो से चार हजार रूपये तक है। इस टीके से निमोनिया से होने वाली शिशुओं की मौत पर विराम लगाने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि विश्व में होने वाली कुल शिशु मृत्यु में से 16 प्रतिशत निमोनिया से कारण होती हैं। वहीं हर छह में से एक बच्चे की मौत का कारण निमोनिया है।


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