जल संस्थान की लापरवाही का नतीजा
कमासिन, के एस दुबे । क्षेत्र में जल संस्थान द्वारा घर घर में पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनी पानी की टंकियां बेमतलब साबित हो रही हैं। मानक को दरकिनार कर बनाई गई पानी की टंकियां चंददिनो की सप्लाई के बाद सफेद हाथी की तरह खड़ी है। विभागीय उदासीनता के कारण रखरखाव के अभाव में गांवों में बनी पानी की टंकियां जर्जर हालत में है। अनदेखी के कारण विभाग की लाखों की धनराशि पानी में डूब रही है।
क्षेत्र पंचायत के 55 ग्राम पंचायतों के मध्य 64 गांवों में लगभग एक दर्जन से ज्यादा गांवों में जल संस्थान द्वारा घर घर पर पेयजल आपूर्ति के उद्देश्य को लेकर बनाई गई पानी की टंकियां रखरखाव के अभाव में दम तोड़ रही हैं। गांवों के लोगों को पानी तो नसीब नहीं हो रहा बल्कि वहां पर तैनात कर्मचारियों के वेतन का बोझ विभाग को उठाना पड़ रहा है। क्षेत्र के बेर्राव, गुरौली, विनवट, दौतौरा, अंडौली, बुढौली, भाटी, सुनहुला आदि दर्जनों गांवों में बनी टंकी से एक बूंद पानी नहीं निकल रहा। शुरुआती दौर पर इन्हीं टंकियों के माध्यम से गांवों के लोगों की प्यास बुझाने का जिम्मेदारी जल संस्थान को सौंपी गई थी लेकिन संस्थान के उदासीन रवैये के बदौलत रखरखाव के अभाव में पानी
की टंकियां सफेद हाथी की तरह खड़ी हो गई है। गांव के कनेक्शन धारियों उपभोक्ताओं का कहना है कि गांव में बनी पानी की टंकियों से लोगों को आशा जगी थी कि गांव के लोगों को भरतपुर पीने का पानी मिलेगा। लेकिन चंद दिनों सप्लाई के बाद इन टंकियों ने दम तोड़ने का काम शुरू कर दिया। जो अब एक दशक से ज्यादा समय से सफेद हाथी की तरह खड़ी होकर लोगों को मुंह चिढ़ा रही है। विभागीय उदासीनता की वजह से गांव के लोगों को पानी तो नहीं मिल पा रहा लेकिन वहां के तैनात कर्मचारियों को वेतन न मिलने से उनके परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। पानी की टंकियों के निर्माण में शासन का लाखों रुपया लगा हुआ है जो उद्देश्य बिहीन होकर बेमतलब साबित हो रहा है। अब गांव के लोगों ने पानी की सप्लाई न मिलने से अपने घरों पर लगे कनेक्शन भी हटवा दिए हैं।
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| शोपीस बनी पानी की टंकी |


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