राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कालेज में हुआ डायलिसिस
डायलिसिस मरीज का कोविड पाजीटिव होना गंभीर
बांदा, के एस दुबे । डाक्टर को भगवान का रूप माना जाता है। कोरोना काल में डाक्टरों की भूमिका इस कहावत को चरितार्थ करती है। मंडल मुख्यालय में स्थापित राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कालेज में कोविड-19 पाजीटिव मरीजों के इलाज के लिए बनायी गयी कोरोना ब्लाक की कोविड आईसीयू में पहली बार कोरोना पाजीटिव गुर्दा रोगी 50 वर्षीय मरीज का डायलसिस किया गया है। वह पूरी तरह सफल रहा। प्राचार्य ने चिकित्सकों की टीम की सराहना की है।
 |
| हीमो डायलिसिस यूनिट आईसीयू में भर्ती कोरोना पाजिटिव मरीज |
मेडिकल कालेज प्राचार्य डा. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि हमीरपुर जनपद के मौदहा का 50 वर्षीय व्यक्ति कई साल से गुर्दे की बीमारी से पीड़ित था। 22 जून को वह कोविड पाजीटिव पाया गया। इसके बाद मेडिकल कालेज के कोरोना वार्ड में भर्ती कराया गया था। हालत खराब होने की वजह से उसे हीमो डायलिसिल यूनिट आईसीयू में भर्ती किया गया। गुर्दा रोग से गंभीर बीमार होने की वजह से उसका डायलिसिस बेहद जरूरी हो गया था। डाक्टरों ने हालत नाजुक देखते हुए तुरंत आक्सीजन लगाई और दवाएं व इंजेक्शन देकर हालत पर नियंत्रण किया। मेडिकल कालेज के उप प्राचार्य डा. एसके कौशल ने बताया कि आइसोलेशन वार्ड में तैनात डायलसिस टीम को तैयार किया गया। डायलिसिस यूनिट इंचार्ज डा. एसके यादव ने अपनी टीम के साथ मरीज का डायलिसिस किया। डाक्टरों का यह पहला प्रयास पूरी तरह सफल रहा। टीम में डा. रजनीश, डा. आकाश सहित स्टाफ नर्स उमा, पूजा व रुबीना शामिल रहीं। प्राचार्य ने कहा कि ऐसे मरीजों के लिए कोविड-19 का पाजीटिव होना गंभीर माना जाता है, परंतु डाक्टरों के प्रयास से मरीज का डायलिसिस सफल रहा। कोरोना काल में डाक्टरों के इस कोशिश के लिए मेडिकल कालेज प्रशासन ने टीम की सराहना की।
No comments:
Post a Comment