बस अड्डों व बसों के अंदर सोशल डिस्टेंसिंग के नियम हो रहे तार-तार
फतेहपुर, शमशाद खान । बिहार विधानसभा चुनाव व यूपी समेत देश की कई विधानसभाओं के होने वाले उप चुनाव के बाद एक बार फिर से कोरोना को लेकर आंकड़ों में लगातार वृद्धि होना शुरू हो गया है। ऐसे में सरकार की ओर से कोरोना महामारी से बचाव को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की जा चुकी है। शादियों में जहां लोगो की संख्या सीमित करके मात्र सौ कर दी गयी है और सार्वजिनक जगहों पर भीड़ एकत्र होने पर एक बार फिर से सख्ती बढ़ा दी गयी है। कोरोना के टेस्ट को बढ़ाने के साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन व मास्क की अनिवार्यता को लागू कराया जा रहा है। ऐसा न करने वालों पर भारी भरकम जुर्माना लगाया जा रहा है लेकिन सरकार के यह नियम रोडवेज बसों में कहीं नहीं दिखाई दे रहे हैं। कोरोना को लेकर दहशत के माहौल के बीच रोडवेज बसों में यात्रियों की उमड़ने वाली भीड़ में जहां सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ई जा रही है। वहीं कोरोना को लेकर महानगरों से आने वाली भीड़ के चेहरे पर खौफ देखा जा सकता है। इसे कोरोना के दौरान एक बार फिर से लॉकडाउन लगने के अंदेशे से उमड़ने वाली भीड़ भले ही न माने लेकिन चन्द दिनों में जनपद के सभी बसों के रूटों पर उमड़ने वाली भीड़ आखिर सामान्य तादात से अचानक कई गुना बढ़ोत्तरी को क्या माना जाय? इतनी बड़ी
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| रोडवेज बस पर सवार होने के लिए यात्रियों के बीच मची होड़ का दृश्य। |
तादात में प्रतिदिन लोग रोडवेज बसों में यात्रा करने को निकल रहे हैं जिसके लिए रोडवेज बसों की व्यवस्था करने में पसीने छूट रहे हैं। जनपद के कानपुर मार्ग, प्रयागराज रुट बांदा, महोबा, चित्रकूट, लखनऊ रुट पर प्रतिदिन सैकड़ों बसों का संचालन किया जाता है। जिसमें जनपद के डिपो से भी बसे लगाई जाती है लेकिन लोगों की उमड़ने वाली इस भीड़ के आगे सारी व्यवस्थायें धड़ाम नजर आ रही हैं। रोडवेज बस अड्डे के बाहर बसों के इंतेजार में बैठी भीड़ बसों के अंदर खाली सीट से कई गुना होती है। कोरोना काल के दौरान रेल सेवाएं बन्द होने के बाद मात्र चन्द ट्रेनों का ही संचालन किया जा रहा है। जिसमे केवल रिजर्वेशन के यात्रियों को ही बैठने की अनुमति होती है। ऐसे में यात्रियों के पास आने जाने के लिये रोडवेज बसे ही एक मात्र सहारा बनी हुई है। सुबह से लेकर शाम तक चलने वाली सभी बसों में क्षमता से अधिक सवारियां ढोने वाली रोडवेज की बसे विभाग के लिये भले ही बढ़ी हुई कमाई करने में लगी हो लेकिन रोडवेज की यह बसे कोरोना काल में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाने के साथ ही सरकारी नियम को भी तार तार करने में कोई कमी नहीं छोड़ रही हैं। बस स्टॉप का नजारा देखकर लोग भीड़ की अवाक के बारे में सोचने पर मजबूर है। अपने-अपने लगेज के साथ पुरुषों, महिलाओ वृद्धों और बच्चों के साथ निकले लोग अपने गंतव्यों को पहुंचने को आतुर नजर आते है। लोगों की इस भीड़ में न तो सोशल डिस्टेंसिंग नजर आती है न ही कोरोना का कोई खौफ। हर तरफ यात्रियों को मंजिल तक पहुंचने की होड़ दिखाई देती है। आखिर इस भीड़ के आने जाने का क्या मकसद हो सकता है। बसों से अलग अलग रूटों से बस स्टॉप को आने और आगे की यात्रा में जाने वाली सवारियों में बड़ी संख्या गैर जनपदों की सवारियांे की होती है। ऐसे में यात्रियों की भीड़ को देखकर एक बार फिर से कोरोना काल के दौरान लोगों को गांव वापस जाने वाला नजारा आंखों से सामने घूमने लगता है। उनके घरो को वापसी होने के दौरान सामने आने वाली समस्याओं की याद ताजा हो जाती है।


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