तीस साल पुराने मामले में एससी-एसटी कोर्ट का फैसला
प्रत्येक अभियुक्त पर 32 हजार रुपए का लगाया जुर्माना
फतेहपुर, मो शमशाद । असोथर थाना क्षेत्र के टीकर गांव में करीब तीस वर्ष पहले पुलिस टीम पर घात लगाकर किए गए जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट डॉ. मो. इलियास ने कांस्टेबल की हत्या और पुलिस कर्मियों समेत एक अभियुक्त को घायल करने के मामले में सीताराम मौर्य सहित आठ अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक अभियुक्त पर 32-32 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
घटना 22 अक्टूबर 1997 की रात की है। तत्कालीन थानाध्यक्ष श्याम नारायण सरोज पुलिस बल के साथ गश्त पर थे। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि गुंडा एक्ट का वांछित खुन्नी उर्फ फूल सिंह शिवबोधन का डेरा मंजरी, सातों धरमपुर स्थित अपने घर में मौजूद है। सूचना पर पुलिस टीम उसकी गिरफ्तारी के लिए रवाना हुई। गेडुरी गांव के पास सरकारी जीप खड़ी कर पुलिस कर्मी ट्रैक्टर से अभियुक्त के घर पहुंचे और खुन्नी उर्फ फूल सिंह को गिरफ्तार कर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में घात लगाए बैठे सीताराम मौर्य, राधेश्याम मौर्य, फूल सिंह, धरम सिंह, राम सिंह, छोटा सिंह, रामराज और रमेश लोनिया ने पुलिस टीम को घेर लिया और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुए हमले से पुलिस टीम संभल पाती, इससे पहले ही गोली लगने से कांस्टेबल रामसेवक की मौके पर मौत हो गई। फायरिंग में तत्कालीन थानाध्यक्ष श्याम नारायण सरोज, उप निरीक्षक भिखारी, सीपी सदाशिव सिंह, अनुरुद्ध सिंह, हरीश कुमार, रामवीर सिंह, शोभनाथ सिंह व गिरफ्तार अभियुक्त खुन्नी उर्फ फूल सिंह घायल हो गए थे। मृतक कांस्टेबल रामसेवक मूल रूप से मालपुर, थाना होलागढ़, प्रयागराज का निवासी था। घटना के संबंध में तत्कालीन थानाध्यक्ष ने सभी आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। लंबे समय तक चले न्यायिक परीक्षण के बाद विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट डॉ. मो. इलियास ने उपलब्ध साक्ष्यों व सहायक शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र उत्तम की दलीलों को सुनने के बाद सीताराम मौर्य समेत सभी आठ अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर 32-32 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।


No comments:
Post a Comment