चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। सत्य के मार्ग में भयंकर कठिनाईयां हैं, लेकिन पराजय नहीं। सत्यवादी पुरुष एवं सरल हृदय वाले भक्त भगवान के प्राण होते हैं।
यह उद्गार मुख्यालय के तरौंहा मोहल्ले में आचार्य अंबिका प्रसाद द्विवेदी के निज निवास पर चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण के दूसरे दिन वृंदावन के भागवत कथा प्रवक्ता आचार्य शिवदीप शास्त्री ने श्रोताओं के समक्ष व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि जिनके हृदय से नित मत्सारिता, कपट, द्वेष निकल जाता है उसी के समझ में भागवत कथा विशेष तौर पर आती है। कहा कि जीवन को आनंदमय बनाने का सुंदर और सरल उपाय है भागवत कथा को जीवन में उतारना। उन्होंने बताया कि जितना सुने उससे आधा बोले। सत्य का पालन करें। मन में यदि दोष हो तो भागवत का फल कभी नहीं मिलेगा। इसलिए किसी के प्रति द्वेष नहीं करना चाहिए। कोई भी कार्य करने से
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| कथा रसपान कराते भागवताचार्य। |
पूर्व प्रभु का स्मरण व ध्यान कर लें। उन्होंने सरल उपाय बताते हुए कहा कि भागवत के माध्यम से जीव के कल्याण के लिए स्वयं भगवान शुकदेव जी के रूप में अवतरण होकर भक्ति को जागृत की है। भागवत प्रवक्ता ने महाभारत का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को सत्य की ताकत से अवगत कराया। बताया कि सत्य के मार्ग पर बेहद कठिनाईयां है, लेकिन अंत में पराजय नहीं होती। सत्यवादी लोग व सरल हृदय के भक्त भगवान के प्राण होते हैं। श्रीमदभागवत का पारायण करते हुए आचार्य लक्ष्मीकांत पाण्डेय ने सुंदर स्वर से गीत सुनाकर आनंदित किया। वेदमंत्रो से आचार्य अरविन्द कुमार त्रिवेदी ने भागवत प्रारंभ के समय यजमान से पूजन कराया। संगीतमय भजनो से आचार्य शांत पाण्डेय एवं आचार्य अजय पाण्डेय ने मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर विजयशंकर द्विवेदी, अजय द्विवेदी, अंजू द्विवेदी, प्रभा द्विवेदी, अनिल द्विवेदी, अभिषेक द्विवेदी, अरुण द्विवेदी, सोनू, महेश द्विवेदी, अभिनव द्विवेदी आदि श्रोतागण मौजूद रहे।


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