मौजूदा सियासत के बीच पूर्व विधायक के बेटे की चुनावी हलचल तेज
जातीय समीकरण के चलते दावेदारी को मिल रहा वजन
फतेहपुर, शमशाद खान । पिछले दो विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने वाली मुख्य विपक्षी पार्टी सपा इस बार सदर सीट से मुस्लिम प्रत्याशी को उतार सकती है। जातीय समीकरण के लिहाज से फिलवक्त पार्टी के लिए मुस्लिम फैक्टर सबसे ज्यादा अहम हैं। ऐसा हाल की सियासत के मद्देनजर भी समझा जा सकता है। यही कारण है कि राजनीति के जानकार सपा से मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जाने की बात काफी वजन से रख रहे हैं।
जिले की सदर विधानसभा सीट से विक्रम सिंह विधायक हैं। सपा दो विधानसभा चुनाव हार चुकी है। सीट के जातीय समीकरण को देखते हुए राजनीतिक पार्टियां उम्मीदवार के चयन पर जोर दे रही हैं। सत्तारूढ़ भाजपा के अलावा मौजूदा समय सपा ही चुनावी जंग में जोरदार इसे दस्तक दे रही है। सपा से कई दावेदार सामने आ रहे हैं लेकिन इन सब में मुस्लिम प्रत्याशी को ज्यादा तवज्जो मिल रही है। गुजरते साल में एक प्रकरण को लेकर जिस प्रकार भाजपा व सपा, अपरोक्ष रूप से आमने-सामने हुई। उससे भी मुस्लिम दावेदारी को वजन मिल रहा है। यही कारण है कि कई मुस्लिम दावेदार, अपनी उम्मीदवारी को लेकर सियासी गलियारों में घूमने लगे हैं। इन्हीं में एक दावा, जहानाबाद और सदर सीट के एक पूर्व विधायक के बेटे का भी है। बताना जरूरी है कि सदर विधायक कासिम हसन की मौत के बाद हुए बाय इलेक्शन में विक्रम सिंह चुनाव जीते थे, इस चुनाव में दिवंगत विधायक के बेटे आबिद हसन हार गए थे। इस लिहाज से भी मुस्लिम प्रत्याशी उतारे जाने की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो चुकी है। सियासी चर्चाओं के बीच एक बार फिर पूर्व विधायक के बेटे को सक्रियता बढ़ती जा रही है। राजनीति के जानकारों की माने तो सदर सीट में मुस्लिम के साथ लोधी फैक्टर भी काफी प्रभावी है।

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