पत्रकार पर जुल्म, सच पर वार
रेलवे पुलिस ने की बेरहमी से पिटाई
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । मानिकपुर रेलवे स्टेशन पर एक पत्रकार को अपनी जिम्मेदारी निभाने की ऐसी सजा मिली, जिसे सुनकर लोकतंत्र पर विश्वास डगमगाने लगे। एक न्यूज चैनल के पत्रकार विजय कुमार सोनकर ने आरोप लगाया कि जब 29 मार्च की सुबह करीब 9ः30 बजे स्टेशन पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि दो रेलवे पुलिसकर्मी गरीब फुटपाथी फल-फूल विक्रेताओं के ठेले उलट रहे थे। यह दृश्य देख पत्रकार ने सच्चाई को कैमरे में कैद करने की कोशिश की, लेकिन पुलिसकर्मियों को यह नागवार गुजरा । आगे बताया कि झपट्टा मारते हुए पुलिस वालो ने
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घाव दिखाता पत्रकार |
उसे गालियाँ दीं, जबरन मोबाइल छीन लिया और वीडियो डिलीट कर दिया। इतना ही नहीं, पहचान पत्र फेंकते हुए उसे घसीटकर थाने ले गए। आरोप लगााया कि थाने पहुंचते ही पत्रकार विजय के साथ और भी खौफनाक बर्ताव किया गया। वहां मौजूद डबल स्टार अधिकारी गुप्ता ने उसे एक कमरे में बंद कर जातिसूचक गालियाँ दीं और लात-घूंसों व डंडों से बेरहमी से पीटा। पत्रकार विजय की चीखें दीवारों में गुम हो गईं और लोकतंत्र का चौथा स्तंभ एक बार फिर दमन का शिकार हो गया। विजय ने जैसे-तैसे खुद को संभालते हुए पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
दोहराना चाहते थे सीतापुर कांड?
यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ ही दिन पहले सीतापुर में भी एक पत्रकार की हत्या कर दी गई थी। लगातार हो रहे इन हमलों से यह साफ हो गया है कि सच लिखने और दिखाने की कीमत अब जान देकर चुकानी पड़ रही है।
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फाइल फोटो पत्रकार विजय सोनकर |
लोकतंत्र का प्रहरी माने जाने वाले पत्रकार अब खुद ही असुरक्षित हो गए हैं। सवाल लाजमी है कि क्या प्रशासन दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी अन्याय की धुंध में खो जाएगा?
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