वादिया के झूठे साक्ष्य से पलटा केस
मिथ्या साक्ष्य पर मुकदमा दर्ज
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । माननीय न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में न सिर्फ आरोपी को दोषमुक्त कर दिया, बल्कि वादिया द्वारा न्यायालय में दिये गये मिथ्या साक्ष्य और बयानों से मुकरने पर कड़ी कार्यवाही का आदेश भी पारित कर दिया। विशेष न्यायाधीश (अनु.जाति एवं जनजाति निवारण) राजमणि पाठक की अदालत ने साफ कहा कि यदि वादिया को इस प्रकरण में शासन से कोई अनुदान राशि प्राप्त हुई है तो उसे नियमानुसार वसूलकर राज्य कोष में जमा कराया जाये। यही नहीं, अदालत ने वादिया मिथलेश देवी को दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 344 के अंतर्गत न्यायिक कार्यवाही में मिथ्या साक्ष्य देने के कारण पृथक से विचारण हेतु मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। उल्लेखनीय है कि 17 सितम्बर 2017 को थाना राजापुर में वादिया ने अमर यादव पर छेड़छाड़, मारपीट, जातिसूचक शब्दों और धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया था। इस आधार पर मुकदमा पंजीकृत हुआ और
विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय को भेजा गया। परंतु विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत करने में पूरी तरह विफल रहा और स्वयं वादिया के बयान भी परस्पर विरोधाभासी एवं अविश्वसनीय पाए गये। बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा कि आरोपी को रंजिशन फंसाया गया है, जिसे अदालत ने साक्ष्य के अभाव में सही माना। लिहाजा, न्यायालय ने आरोपी अमर यादव को धारा 323, 504, 506 भादवि एवं एससी/एसटी एक्ट की धाराओं से दोषमुक्त कर दिया। इसके साथ ही, अदालत ने साफ संदेश दिया है कि झूठी कहानियों और मिथ्या साक्ष्य के सहारे न्यायालय को गुमराह करने वालों के खिलाफ अब कड़ी कार्यवाही होगी और सरकार से मिली अनुदान राशि तक वसूली जाएगी।


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