पहाडी केन्द्र पर ताला, सचिव गायब
दिए तत्काल समाधान के आदेश
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । आयुक्त अजीत कुमार ने पुलिस उप महानिरीक्षक राजेश एस के साथ तहसील राजापुर में आयोजित तहसील दिवस में भाग लिया। इस दौरान आमजन द्वारा प्रस्तुत शिकायतों में से पाँच मामलों का समाधान मौके पर ही करा दिया गया, जबकि शेष शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण एवं शीघ्र निस्तारण के लिए उप जिलाधिकारी राजापुर को निर्देशित किया गया कि सभी शिकायतों की आख्या तत्काल उपलब्ध कराएं। तहसील दिवस के उपरान्त आयुक्त ने बहु उद्देश्यीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति, सरधुवा पहाड़ी का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में खाद वितरण केन्द्र पर ताला लटका मिला और सचिव अनुपस्थित पाए गए। इस लापरवाही पर आयुक्त ने सचिव के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। वहीं, पहाड़ी (उत्तरी एवं दक्षिणी) समितियों के औचक निरीक्षण में लगभग 100 किसान खाद के लिए लाइन में खड़े पाए गए। मशीन में सर्वर बाधित होने से वितरण ठप पड़ा था। इस पर आयुक्त ने उप निबंधक एवं उपायुक्त सहकारिता को आदेशित किया कि समस्या का तत्काल निराकरण कर आज ही सभी कृषकों को खाद उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद आयुक्त ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, पहाड़ी का निरीक्षण किया। निरीक्षण के समय चिकित्सा अधिकारी उदय प्रताप सिंह उपस्थित मिले, लेकिन केंद्र में विद्युत आपूर्ति बाधित थी, जिससे मरीजों को असुविधा हो रही थी। इस पर आयुक्त ने अधिशाषी अभियंता विद्युत, चित्रकूट को तत्काल बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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| पहाडी में जांच करते आयुक्त |
मेला के मद्देनजर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को भारी वाहनों पर प्रतिबंध, लागू होगा डायवर्जन प्लान चित्रकूट। आगामी भाद्रपद अमावस्या मेला (22 से 24 अगस्त) में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक यातायात व्यवस्था लागू कर दी है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए धारा 115 मोटर वाहन अधिनियम 1988 एवं उप्र मोटर यान नियमावली 1998 के अंतर्गत कर्वी नगर व मेला क्षेत्र में भारी और मध्यम मालवाहनों (आपातकालीन व आवश्यक वस्तुओं के वाहन छोड़कर) के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यह प्रतिबंध 21 अगस्त की सुबह 5ः30 बजे से 25 अगस्त की रात 12 बजे तक प्रभावी रहेगा।
प्रतिबंधित मार्ग
- जीरो प्वाइंट बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से रेहुटिया तक प्रयागराज रोड
- लोढ़वारा मोड़ राष्ट्रीय मार्ग 731ए से धनुष चौराहा, देवांगना घाटी, यूपी/एमपी बॉर्डर तक
- बेड़ी पुलिया चौराहा से निर्मोही अखाड़ा तक
- शिवरामपुर तिराहा से पर्यटक तिराहा तक
- चितरागोकुलपुर तिराहा से यार्डलैंड स्कूल, यूपी/एमपी बॉर्डर तक
- लैना बाबा तिराहा से संग्रामपुर तिराहा, खोही तिराहा, सहकारी समिति यूपी/एमपी बॉर्डर तक
- भरतकूप तिराहा से रामशैय्या, संग्रामपुर तिराहा तक
26 अगस्त से 30 दिनों तक रहेगा नो-एंट्री मेला समाप्ति के बाद भी श्रद्धालुओं की भीड़ और सुगम यातायात के लिए 26 अगस्त से आगामी 30 दिनों तक कर्वी नगर में भारी व मध्यम मालवाहनों पर दिन में आंशिक प्रतिबंध लागू रहेगा। मुख्य मार्गों पर सुबह 5ः30 बजे से रात 9/10ः30 बजे तक भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा।
डायवर्जन प्लान ऽ प्रयागराज/कौशांबी से बांदा जाने वाले वाहनः बोड़ी पोखरी चौराहा → राजापुर → बांदा मार्ग। ऽ बांदा से प्रयागराज जाने वाले वाहनः जीरो प्वाइंट → बबेरू → कमासिन → राजापुर → प्रयागराज। ऽ सतना से प्रयागराज/कौशांबी जाने वाले वाहनः बड़ी पाटिन तिराहा → इटवा डुडैला → मारकुंडी तिराहा (मानिकपुर) → पुलिस लाइन तिराहा (खोह) → बोड़ी पोखरी → प्रयागराज/कौशांबी। ऽ हल्के वाहन व दोपहिया (सतना/जानकीकुंड की ओर)ः धनुष चौराहा → देवांगना घाटी होकर आवागमन करेंगे।
तो क्या कचरा-घर बनाने के लिए खाली कराई गई थी मराठाकालीन पुरातत्व महत्व का ऐतिहासिक किला? 0 जिले में कूडे घर की कमी? 0 पुरातत्व विभाग व जिम्मेदार बेखबर चित्रकूट। जिले की पहचान रही यह मराठाकालीन ऐतिहासिक इमारत, जिसे लोग पुरानी कोतवाली के नाम से जानते हैं, कभी सरकारी दफ्तरों और कर्मचारियों की चहल-पहल से गुलजार रहती थी। यहां कई विभागों के दफ्तर थे, सरकारी अधिकारियों के आवास थे और आसपास की आम जनता भी इसके आंगन में अपनी रौनक बिखेरती थी। यह जगह केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं थी, बल्कि जिले की धड़कन थी, इतिहास का जीवंत दस्तावेज थी। लेकिन अब सवाल है कि आखिर प्रशासन को ऐसी क्या जल्दी थी कि इस धरोहर को आनन-फानन में खाली कराया गया? न तो यहां गिरने का कोई खतरे का बोर्ड टंगा था, न ही यह इमारत इतनी जर्जर हुई थी कि तुरंत उजाड़ने की नौबत आती। इसके बावजूद, मानो किसी छिपी साजिश या अदृश्य आदेश के तहत, इसे अचानक वीरान करवा दिया गया। और नतीजा? जहां कभी तिरंगा लहराता था, वहां अब कूड़े के ढेर से बदबू उठ रही है। और तो और, मजे की बात देखिए- इस इमारत का अंदरूनी हिस्सा अब खुद प्रशासन ही गिरवा रहा है और उसका मलबा औने-पौने दामों पर बेचा जा रहा है। सवाल लाजमी है कि क्या प्रशासन ने इस धरोहर को जान-बूझकर कबाड़खाना बनाने का रास्ता चुना था? पिछले सप्ताह जब पूरा जिला स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे से रंग था, तब यह मराठाकालीन धरोहर- जो कभी प्रशासनिक गरिमा का प्रतीक थी। कचरे और खंडहर में तब्दील होकर कराह रही है। यह दृश्य सिर्फ बदइंतजामी नहीं, बल्कि इतिहास के गाल पर पड़ा तमाचा है। अब जिम्मेदारों से यह सवाल टाला नहीं जा सकता कि क्या प्रशासन की नजर में धरोहरें महज बेचने/उजाड़ने लायक मलबा रह गई हैं? क्या इतिहास को संरक्षित करने की बजाय, उसे कबाड़खाना बनाना ही नई नीति है?


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