राइस मिल परिसर में आयोजित हो रही श्रीमद् भागवत कथा का पांचवां दिन
गिरवां, के एस दुबे । गिरवां स्थित ग्राम भूतेश्वर राइस मिल बस स्टाप गिरवाँ में पितृपक्ष में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का पंचम दिवस कथा के पावन प्रसंग में परम पूज्य महराज श्री ने भगवान का जन्मोत्सव बड़े धूम धाम से मनाया गया। लाला का जन्म सुनते ही गोकुल के सब नर नारी गोपी ग्वाल सभी मिलकर के भगवान का जन्म उत्सव मनाने लगे! कथा परीक्षित कल्पना श्यामाचरण उपाध्याय लाला के जन्म उत्सव भक्तवत्सल गोप गोपियों व ग्वालों के साथ बड़े हर्ष के साथ कथा स्थल गोकुल में भजनों से झूमने लगे सभी लोग नंदबाबा यशोदा को बधाइयां दी। उधर कंस के हाथ से छूट कर योगमाया ने बताया कि तुझे मारने वाला पैदा हो गया है, तो कंस ने हाल में ही जन्में बालकों को मारने के लिए सेना भेजी। जब उसे पता चला कि गोकुल में नंदबाबा के यहां बालक का जन्म हुआ है और वहां बड़े ही धूमधाम से उत्सव मनाया जा रहा है तो इसके बाद उसने पूतना नाम की राक्षसी को भगवान को मारने के
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| कथा श्रवण करते हुए श्रोता। |
लिए भेजा पूतना भगवान को मारने के लिए अपने स्तनों में जहर लगा कर आयी लेकिन भगवान श्री कृष्ण दूध के साथ उसके प्रणों को भी पीने लगे। पूतना अपने स्वरुप में आई भगवान ने पूतना को माता की गति प्रदान की। ऐसा दयालु भगवान के अलावा और कौन हो सकता है। पूज्य महराजश्री ने भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन किया। भगवान ने माखन चोरी करके सभी गोपियों को सुख प्रदान किया और भगवान का नामकरण संस्कार हुआ। गर्गाचार्य ने भगवान का नाम श्रीकृष्ण व भैया का नाम बलराम रखा। कृष्ण और बलराम ब्रज में अनेक लीलायें करते है। माता यशोदा नंदबाबा को सुख प्रदान करते है। भगवान ने गोपियों का चीर हरण किया। इसके बाद श्री गिर्राज गोवर्धन की पूजा का प्रसंग श्रवण कराया! भगवान श्रीकृष्ण ने गोर्वधन पर्वत को सात दिन तक धारण किया। इन्द्र का मान मर्दन किया। सभी गोप, ग्वाल,ब्रजवासी भगवान की शरण में आये। गिर्राज जी को छप्पन भोग लगाये, और गोवर्धन की पूजा की सभी भक्तों ने मिलकर श्री गिर्राज की आरती की !प्रसाद ग्रहण किया।


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