देवेश प्रताप सिंह राठौर
वरिष्ठ पत्रकार
उत्तर प्रदेश बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) एवं युवा चर्चा के संयुक्त तत्वावधान में “महिला सशक्तिकरण : जागरूकता और कार्रवाई” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य महिलाओं की स्थिति, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक भागीदारी से जुड़े पहलुओं पर सार्थक विमर्श करना था।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. सुनील कुमार कबिया (निदेशक, IQAC, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय) ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं बल्कि जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। जब महिलाएँ आत्मनिर्भर होकर निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करेंगी तभी समाज में स्थायी परिवर्तन संभव होगा। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को अवसर और मंच उपलब्ध कराना विश्वविद्यालय और समाज दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रो. अर्चना वर्मा (प्रोफेसर, प्रबंधन विभाग एवं अध्यक्ष, महिला प्रकोष्ठ एवं ग्रिवांस सेल, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय) ने अपने संबोधन में महिला शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन
को सशक्तिकरण की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को यदि समान अवसर मिलें तो वे न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज को प्रगति के रास्ते पर ले जा सकती हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विश्वविद्यालय की ग्रिवांस सेल छात्राओं और महिला कर्मियों को सुरक्षित एवं सकारात्मक वातावरण प्रदान करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। गोष्ठी में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. सिप्पी अग्रवाल (HOD, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, MLB मेडिकल कॉलेज, झाँसी) ने महिला स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाओं का स्वास्थ्य केवल उनका व्यक्तिगत मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे समाज की भलाई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने प्रजनन स्वास्थ्य, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया। इसी क्रम में डॉ. मनु शुक्ला (सहायक प्राध्यापक, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, MLB मेडिकल कॉलेज, झाँसी) ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा की ठोस एवं सुलभ व्यवस्था किए बिना महिला सशक्तिकरण की परिकल्पना अधूरी है। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि नए भारत की तस्वीर वही युवा गढ़ सकते हैं, जो लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों के लिए सक्रिय आवाज उठाएँ। कार्यक्रम का संचालन युवा चर्चा के संस्थापक यश चौरसिया और सह-संस्थापक गौरव खरे ने किया। आयोजन टीम में देवेंद्र (प्रबंधन प्रमुख), सचिन अग्रवाल (तकनीकी प्रमुख), प्रतीक्षा पाटगेंटल (सजावट प्रमुख) सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के छात्र-छात्राओं का विशेष सहयोग रहा। मंच पर वक्ताओं और अतिथियों ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए केवल विचार-विमर्श ही नहीं बल्कि ठोस कार्ययोजना और सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। संगोष्ठी का समापन आभार ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने यह संकल्प लिया कि महिलाओं के प्रति समाज में व्याप्त असमानताओं को मिटाने और उन्हें बराबरी का दर्जा दिलाने के लिए विश्वविद्यालय, चिकित्सा संस्थान और युवा मिलकर लगातार काम करेंगे। वक्ताओं ने यह भी माना कि युवाओं की ऊर्जा और दृष्टिकोण महिला सशक्तिकरण को गति देने में सबसे अहम भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान,प्रो,विनीत कुमार,डॉ मोहम्मद नहीम,प्रो पुनीत विशारियां,डॉ अतुल प्रकाश खरे ,श्री अनिल बौरे,डॉ अमरजोत वर्मा, ,डॉ हितिका यादव,डॉ आशीष वर्मा,डॉ प्रिरियल चतुर्वेदी,डॉ निपुर गौतम, सीनियर ऑफिसर पियूष के बीजू, अंडर ऑफिसर जतिन, सार्जेंट हर्ष कुशवाहा,योगेन्द्र कुमार,दीप नारायण साहू,अभिषेक,राज बर्धन,अंकुर,हिमांशु यादव,नमन दांगी ,प्रवेश गोस्वामी,प्रतिभा,हर्षित,ऋषभ चौरसिया का योगदान सराहनीय रहा।


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