बाल विवाह छोड़ो, शिक्षा अपनाओ
2030 तक बाल विवाह पर पूर्ण विराम
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ अब धर्म की आवाज भी गूंजने लगी है। 12 से 14 सितंबर तक आयोजित वैश्विक अंतरधार्मिक सप्ताह के अंतर्गत जन कल्याण शिक्षण प्रसार समिति ने एक्सेस टू जस्टिस प्रोग्राम के तहत विशेष अभियान चलाएगा। इस दौरान मंदिर, मस्जिद और आश्रमों के धर्माचार्यों ने एक स्वर में समाज से अपील होगी कि बच्चों को समय से पहले विवाह के बंधन में न बांधा जाए, बल्कि उन्हें शिक्षा और संस्कार देकर सशक्त बनाया जाए। कामतानाथ के प्रथम मुखारविन्द के स्वामी मदनगोपाल दास ने स्पष्ट कहा कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य का अंधकार है, शिक्षा ही वास्तविक ज्योति है। वहीं यज्ञ वेदी निर्वाणी मंदिर के
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| धर्मगुरु बने बदलाव की आवाज- चित्रकूट से उठी बाल विवाह मुक्त भारत की पुकार |
स्वामी सत्यप्रकाश दास ने धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए बाल विवाह को अनुचित ठहराया। नूरानी मस्जिद के मुफ्ती सलाउद्दीन ने नमाजियों को बाल विवाह के दुष्परिणाम बताए और सामूहिक शपथ दिलाई। संस्थान प्रमुख शंकर दयाल पयासी ने आंकड़ों के हवाले से बताया कि भारत में आज भी 20-24 वर्ष की 23.3 प्रतिशत महिलाएं 18 वर्ष से पहले शादी के बंधन में बंध जाती हैं, जिससे शिशु मृत्यु दर बढ़ जाती है। यही कारण है कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने 2022 से बाल विवाह मुक्त भारत अभियान चलाया, जिसके तहत अब तक 73,501 बाल विवाह रोके गए और 4.9 करोड़ शपथ कराई गईं। जन कल्याण शिक्षण प्रसार समिति का मानना है कि जब सभी धर्मगुरु मिलकर इस कुरीति के खिलाफ आवाज उठाएंगे तभी बाल विवाह का अंत संभव होगा।
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