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Sunday, February 15, 2026

उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति और जगद्गुरु ने किया 53वें राष्ट्रीय रामायण मेले का शुभारम्भ

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : राष्ट्रीय रामायण मेले के 53वें महोत्सव का उदघाटन समूहिक रूप से दीप प्रज्जवलित कर अयोध्या से पधारे जगद्गुरू राघवाचार्य महाराज व उच्च न्यायलय के न्याय मूर्ति अजीत कुमार व उत्तर प्रदेष षासन के जल षक्तिराज्य मंत्री रामकेष निषाद ने किया। जगद्गुरू श्री राघवाचार्य ने राम चरित मानस विष्व का प्रथम ग्रन्थ बताते हुए मानस को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किये जाने कि जारूरत बतायी। रामायण विष्व  में अनेक है जो  दोष रहित है। रामायण भारत का प्राण है रामायण का संदेष जन-जन तक पहुँचाना रामायण मेले का ही उद्देष्य है। उन्होने श्रीराम को सभी जीवों की आत्मा बताया वहीं कहा भगवान का एक नाम न्याय भी हैं। चित्रकूट और अयोध्या दोनों समान है। उन्होने कहा की भगवान श्रीराम ने जानकी जी को बताया था कि चित्रकूट का पर्वत ही अयोध्या है। यहा के जीवों को अयोध्यावासी समझों यहाॅ की मन्दाकिनी सरयू का ही रूप है। जगद्गुरू ने कहा की चित्रकूट में भगवान राम हमेषा बास करते हैं। चित्रकूट सतदिन बसत प्रभु श्री लखन समेत। उन्होने बताया कि जानकी जी को


जब जक वो चित्रकूट में रही इतना अधिक आनन्द प्राप्त हुआ। उतना कभी मिथला और अयोध्या में नहीं प्राप्त हुआ। राष्ट्रीय रामायण मेला का मूल उद्देष्य धर्म की स्थापना करना है। वहीं उन्होने महर्षि वाल्मीकि के रामायण को विष्व का प्रथम ग्रन्थ बताया कि महर्षि वाल्मीकि ही तुलसी के रूप में जन्म लेकर रामचरित मानस की रचना की उच्च न्यायलय के न्याय मूर्ति अजीत कुमार ने कार्यक्रम की अध्याक्षता करते हुए कहा कि तुलसी बाबा ने यह लिख दिया है कि जो जिस कर्म को कर रहा हैं यानी जो जिस व्यवसाय में लगा है उस व्यवसाय में सत्य को धारण करे और उसी के मार्ग से ईष्वर की पूजा करे। भगवान त्रैता युग में अयोध्या में जन्म लिये थे चित्रकूट भी अयोध्या जैसा है। यहा भी उन्होने निवास  किया द्वापर में भगवान कृष्ण के रूप में उन्होने अवतार  लिया महाभारत भी सत्य की असत्य पर विजय का ग्रन्थ है जो यह बताता है कि धर्म की स्थापना करने के लिए ईष्वर बार-बार जन्म लेगे यानी जब भी हम अपने धर्म अपने सत्य से हटेगे तब तब ईष्वर इस भूमि की रक्षा करने के लिए स्वयं आयेगे क्योंकि मनुष्य ईष्वर की सबसे सुन्दर रचना है।


53 वें राष्ट्रीय रामायण मेले के उद्घाटन अवसर पर पधारे उ0प्र0 सरकार के जल ष्षक्ति राज्य मंत्री  रामकेष निषाद ने कहा कि यह ऐतिहासिक रामायण मेला है इसमें देष भर के विद्वान मर्मज्ञ अध्यात्मिक जानकार चर्चा करते है। रामायण का अनुवाद अनेक भाषाओं में हो चुका है। जो दुनिया के देष हमारी सनातन  संस्कृति को मानते और जानते है वहाॅ निष्चित रूप से रामायण की चर्चा होती है। जहाॅ से पूरी दुनिया में एक सन्देषा जाए कि हमारा देष भारत वर्ष विभिन्न भाषाओं का देष होते हुए भी एकता के सूत्र में कैसे फिरोया जाता है। राष्ट्रीय रामायण मेला के उद्घाटन सत्र में आए संत मनीषियों विद्वानों कलाकारों का सम्मान करते हुए मेले के अध्यक्ष प्रषांत करवरिया और महामंत्री करूणा ष्षंकर द्विवेदी स्वागताध्यक्ष पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र ने सभी को माल्यार्पण कर श्रीफल,अंगवस्त्र भेट कर स्वागत किया। रामायण मेले के मंच से 52 वें राष्ट्रीय रामायण मेले की स्मारिका का विमोचन भी सम्पन्न हुआ।  


इसके पूर्व चित्रकूट धाम परिक्षेत्र के सभी अखाडों के संत महन्तों बैंड बाजे और अपने-अपने निषानों के साथ आए यहा पर कार्यकारी अध्यक्ष प्रषान्त करवरिया व पूर्व  सांसद भैरों प्रसाद मिश्र आदि ने निषानों की पूजा कर सम्मानित किया।


प्रथम दिवस रामाधीन आर्य  मउरानीपुर झांसी और रोषनी षर्मा बेसण्डा बाँदा ने भजन सन्ध्या से अपनी ओर अकर्षित किया आल्हा गायन महोबा के ष्रद अनुरागी  लोकगीत लखनऊ के प्रीती लाल, अंजली खन्ना नृत नाटिका राम की षक्ति पूजा बाँदा की श्रद्धा निगम लोकगीत संजोली पाण्डे  व रासलीला वृन्दावन के भूदेव षर्मा ने लोगों को मंचन कराया। संचालन चन्द्रिका प्रसाद दीक्षित (ललित), करूणा ष्षंकर द्विवेदी। इसके पूर्व मेले के स्वागताध्यक्ष पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र ने उद्घाटन सत्र में पधारे सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए मेले के उज्जवल भविष्य की कामना कि वहीं करूणाष्षंकर द्विवेदी ने  मेले की परिकल्पना करते हुए बताया कि विष्व में अनेक राष्ट्रों में रामायण मेला सम्पन्न होता है। लेकिन चित्रकूट में 53 वें वर्ष में प्रवेष कर रहा राष्ट्रीय रामायण मेला अन्य मेलों की तुलना में अनोखा होता है। जिससे लोग धर्म और संस्कृति कि प्रेरणा लेते है इसी क्रम में ही की एक महिला ष्वेता सिंह रामसेन्टर र्पोट लूई मारिसस चित्रकूट धाम में सम्पन्न हो रहे राष्ट्रीय मेले के अवलोकनार्थ व मेले के उद्देष्यों से सीख लेने पधारी है। पूर्व राज्य मंत्री चन्द्रिका प्रसाद उपाध्याय पूर्व विधायक दिनेष मिश्रा, चन्द्र प्रकाष खरे महंत मदन दास, दिव्य जीवन दास, हेमराज चतुर्वेदी श्रीलाल पचैरी पंकज अग्र्रवाल मानस किनकर रामप्रताप षुक्ल आदि मौजुद रहे।


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