बिना सबूत गिरफ्तारी पर कोर्ट सख्त
कॉल डिटेल से बनी कहानी भ्रामक
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । 43 करोड़ के चर्चित ट्रेजरी घोटाले में नाम उछलने के बाद सुर्खियों में आए कथित बिचौलिए देव कुमार उर्फ ‘बोग्गन’ त्रिपाठी को आखिरकार इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई। 08 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई में याची पक्ष के अधिवक्ता क्रांति किरण पांडेय की तीखी और सटीक बहस ने केस की दिशा
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| अधिवक्ता क्रांति किरण पाण्डेय |
ही बदल दी। अदालत में दलील दी गई कि पुलिस ने बिना ठोस साक्ष्यों के केवल कॉल डिटेल रिकॉर्ड और एक आरोपी अवधेश नारायण के बयान के आधार पर देव कुमार को घसीट लिया, जबकि उनके खाते में ट्रेजरी का एक भी रुपया ट्रांजैक्ट नहीं हुआ। इतना ही नहीं, प्रथम सूचना रिपोर्ट में भी उनका नाम तक दर्ज नहीं था, जिससे गिरफ्तारी पर
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| पुलिस हिरासत में देव कुमार त्रिपाठी |
सवाल और गहरे हो गए। 26 जनवरी 2026 को हुई गिरफ्तारी को अधिवक्ता ने न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए निर्दोष को फंसाने की साजिश करार दिया। अधिवक्ता ने बताया कि पुलिस ने पहले आरोपी को बिचौलिया कहा लेकिन मजे की बात है कि बोग्गन के खाते मे तो एक रुपए भी नही आए। इन तथ्यों और प्रभावी पैरवी को गंभीरता से लेते हुए माननीय न्यायालय ने देव कुमार उर्फ बोग्गन त्रिपाठी को जमानत पर रिहा करने का आदेश सुना दिया। अब इस फैसले के बाद पुलिस की जांच पद्धति और पूरे घोटाले की सच्चाई पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है।
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