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Saturday, April 11, 2026

भागवत कथा के तीसरे दिन श्री कृष्ण जन्मोत्सव का किया गया सुंदर वर्णन

बबेरू/ओरन/बांदा, के एस दुबे । कस्बे के तिलहर देवी मंदिर परिसर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन आज  कथा व्यास  ने भक्तों को श्रीकृष्ण जन्म के सुंदर प्रसंग का वर्णन किया। भागवत कथा के मुख्य यजमान शंकर्षणदत् त्रिपाठी ने भावबिभोर होकर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया। कथा प्रसंग में कथा व्यास अनन्त विभूषित परम श्रद्धेय भागवत मर्मज्ञ पंडित श्री बटुक जी महाराज वृंदावन जी ने कृष्ण जन्म का वर्णन करते हुए बताया कि अपने चाचा देवक की बेटी के विवाहोपरान्त कंस ने अपने ही रथ पर वासुदेव और देवकी को छोडने जा रहे थे। तभी आकाश से गर्जना होती है कि कंस, देवकी के गर्भ से जन्मीं आठवीं संतान तेरा काल बनकर तेरा नाश करेगी। कंस ने भय के वशीभूत होकर अपनी बहन देवकी एवं वासुदेव को कारागार में डाल दिया और एक एक कर छह संतानों का जन्म लेने के साथ ही वध कर दिया। सातवें गर्भ का संकर्षण हो गया। उधर देवकी ने आठवां गर्भ धारण किया तभी कंस ने सैनिकों को सावधान कर दिया कि मेरा काल आ रहा है।जब प्रभु के प्राकट्य का शुभ अवसर आया तब "काल: परमशोभना"- मौसम सुहावना‌ हो गया, रात्रि मे पंकज विकसित हो‌ गये।


भादो महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि बुधवार का दिन,रोहणी नक्षत्र,हर्षण योग,बव करण, मध्यरात्रि में भगवान नारायण चतुर्भुजी रूप में प्रकट हुए और कहा कि मुझे गोकुल नंदबाबा के यहां छोड़ आओ। वहां से योगमाया को साथ ले आना। ऐसा कहकर पुनः नवजात बालक बन गये। कथावाचक श्री बटुक जी ने बताया कि उधर गोकुल में कृष्ण के जन्म पर बधाइयों का दौर शुरू हो जाता है जिसमें चौरासी कोस ब्रज को आमंत्रित किया जाता है। कथा स्थल पर इस मौके पर ब्रज में हो रही जय जयकार नंद घर लाला आयो है भजन पर सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने नृत्य किया। उन्होंने कहा कि हर मां की ख्वाहिश होती है कि उसकी संतान संस्कारवान हो। वह राम जैसा आज्ञाकारी हो उनके जैसी मर्यादा का पालन करने वाला हो लेकिन इसके लिए यह भी जरूरी है कि जननी मां को भी कौशल्या जैसा बनना पड़ेगा। उपस्थित महिलाओं ने  सोहर गीत गाकर भगवान का स्वागत किया। कथा यजमान 

 संतोष गुप्ता एवं  श्रीमती मालती गुप्ता ने भगवान की आरती उतारी कथा व्यास अनंत विभूषित परम श्रद्धेय भागवत मर्मज्ञ पंडित श्री बटुक जी महाराज वृंदावन ने श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस में कथा के महत्व और उसके श्रवण से मिलने वाले आध्यात्मिक लाभों पर प्रकाश डाला।  कथा परीक्षित पं शंकर्षणदत् त्रिपाठी एवं  मेघ श्याम त्रिपाठी,घनश्याम त्रिपाठी ने व्यासपीठ की आरती उतारी, कथा के विशेष संरक्षक श्री पंचदश नाम जूना अखाड़ा पिपलेश्वर महादेव मंदिर जोधपुर राजस्थान के महंत श्री धर गिरी जी महाराज की गरिमामय उपस्थिति रही।इस दौरान पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष योगेश द्विवेदी, नगरपंचायत अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, रमाकांत त्रिपाठी,गौरव द्विवेदी, ओमप्रकाश तिवारी,नत्थू द्विवेदी, जितेंद्र त्रिपाठी,ओम दत्त त्रिपाठी,भाजपा मंडल अध्यक्ष आशीष अनुरागी, दिवाकर द्विवेदी,रजोल द्विवेदी सहित भारी संख्या में  श्रद्धालु एवं भक्तजन मौजूद रहे।


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