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Sunday, April 12, 2026

उच्च न्यायालय के आदेश की अनदेखी पर उठा सवाल, प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज

पंडित जवाहरलाल नेहरू डिग्री कॉलेज प्रबंधन विवाद में बड़ा प्रशासनिक कदम, प्राचार्य का वेतन रोकने के निर्देश

बांदा, के एस दुबे  । पं० जवाहर लाल नेहरू पी० जी० कॉलेज, बांदा के प्रबंधन को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2008 में पारित याचिका संख्या-263025 के निर्णयादेश का अब तक पालन नहीं किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कॉलेज प्रबंधन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे, जिनका उद्देश्य संस्थान में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करना था। हालांकि, शिकायत में कहा गया है कि वर्षों बीत जाने के बावजूद इन निर्देशों को लागू नहीं किया गया, जिससे प्रशासनिक अनियमितताओं की स्थिति बनी हुई है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और न्यायालय के आदेश का शीघ्र अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आगे कानूनी कदम उठाने को बाध्य होंगे।


इस प्रकरण ने शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या रुख अपनाता है और क्या वास्तव में न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित हो पाता है या नहीं।

 पं० जवाहर लाल नेहरू पी० जी० कॉलेज, बांदा में चल रहे प्रबंधन विवाद को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी झांसी-चित्रकूट धाम मंडल, प्रो. सुशील बाबू ने मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए प्राचार्य के वेतन पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। विद्यालय प्रबंधन द्वारा प्रशासन को गुमराह करने  पर  पैदा हुए सवाल जारी आदेश के अनुसार, (संलग्नक-6) के अंतर्गत शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन निर्गत करने के लिए “एकल संचालन” (Single Operation) की व्यवस्था लागू किए जाने का प्रावधान है। इसके तहत अब वेतन भुगतान की प्रक्रिया प्राचार्य के माध्यम से नियमानुसार प्रस्तुत की जाएगी, जिससे लंबित वेतन बिलों का पारित होना सुनिश्चित किया जा सके।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के अध्याय-11 की धारा 56, 57, 58, 59 एवं 60 तथा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय परिनियम 1977 के प्रावधानों के अनुसार यह कार्रवाई की जा रही है। विशेष रूप से धारा 60(डी) के तहत “एकल संचालन” का प्रावधान लागू होता है, जिससे वित्तीय अनियमितताओं पर नियंत्रण पाया जा सके। इसके साथ ही, दिनांक 28-02-2026 को की गई शिकायत में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन का भी उल्लेख किया गया है। आदेश में कहा गया है कि न्यायालय के निर्देशों के विधि सम्मत निस्तारण के बाद ही प्राचार्य का वेतन पारित किया जाएगा।

प्रशासन के इस फैसले को शिक्षकों एवं कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे लंबे समय से लंबित वेतन भुगतान की समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है। वहीं, कॉलेज प्रबंधन पर भी नियमों के अनुपालन का दबाव बढ़ गया है।


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