कानपुर, प्रदीप शर्मा - देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित ली मेरीडियन होटल में गुरुवार को इंडो रशियन एजुकेशन समिट“2026” आर ई एस -2026 का शुभारंभ हुआ। इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत और रूस के शिक्षा, चिकित्सा एवं अनुसंधान क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित शिक्षाविद, नीति-निर्माता और विशेषज्ञ शामिल हुए।सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा, चिकित्सा विज्ञान और रिसर्च के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक मजबूत बनाना हैं। सीएसजेएमयू के कुलपति एवं भारतीय विश्वविद्यालय संघ एआईयू के अध्यक्ष प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने संस्थागत सहयोग, इनोवेशन- ड्राइवन एजुकेशन और फैकेल्टी डेवलपमेंट को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्वविद्यालयों को वैश्विक मानकों के अनुरूप शिक्षा, शोध और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच एकेडमिक साझेदारी, स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम्स और कोलैबोरेटिव रिसर्च इनिशिएटिव युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अवसर प्रदान
करने के साथ नॉलेज शेयरिंग और टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देंगे। प्रो. पाठक ने कहा कि एआई, आधुनिक मेडिकल रिसर्च और डिजिटल लर्निंग टूल्स शिक्षा जगत को तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों को एआई ड्राइवन लर्निंग इकोसिस्टम और रिसर्च ओरिएंटेड एजुकेशन को अपनाकर छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि इनोवेशन आधारित शिक्षा मॉडल ही आने वाले समय में वैश्विक प्रतिस्पर्धा का आधार बनेगा। इस सम्मेलन में भारत में रूसी संघ के राजदूत डेनिस अलीपोव, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अभिजात चंद्रकांत शेट तथा भारतीय विश्वविद्यालय संघ एआईयू के महासचिव डॉ. पंकज मित्तल सहित कई प्रतिष्ठित शिक्षाविद और नीति-निर्माता उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, चिकित्सा विज्ञान, रिसर्च सहयोग और वैश्विक शैक्षणिक साझेदारी जैसे विषयों पर चर्चा की गई।


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