ओवरलोडिंग और लीकेज की भेंट चढ़ी 25 करोड़ की सड़क
बांदा, के एस दुबे । केंद्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार जहां एक तरफ सुगम यातायात के लिए करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर भ्रष्ट तंत्र और लापरवाही विकास कार्यों को पलीता लगा रही है। ताजा मामला जनपद बांदा की तिंदवारी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत जसपुरा ब्लॉक का है, जहां दशकों के इंतजार के बाद बनी जसपुरा से सेमरा डेरा 19.890 किमी मुख्य सड़क समय से पहले ही पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। क्षेत्रीय जनता की बेहद पुरानी और बहुप्रतीक्षित मांग पर वर्तमान विधायक व प्रदेश सरकार के जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद ने पूरी शिद्दत से प्रयास किया था। उनके प्रयासों के फलस्वरूप वर्ष 2023 से जनवरी 2024 के बीच 25 करोड़ 54 लाख रुपए की लागत से इस चमचमाती सड़क का निर्माण हुआ था। लेकिन महज डेढ़
साल के भीतर ही यह सड़क बड़े-बड़े गड्ढों और छोटे तालाबों में तब्दील हो चुकी है। अब ग्रामीणों को दोबारा पुराने बदहाल दिनों का अहसास होने लगा है। क्षेत्र में संचालित बालू खदानों से निकलने वाले गिट्टी-बालू से लदे ओवरलोड ट्रक रात-दिन इस सड़क पर बेलगाम दौड़ रहे हैं, जिससे सड़क की गिट्टियां उखड़ गईं और सड़क धंस गई।
हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए बिछाई गई पाइपलाइन जगह-जगह से लीकेज है। पानी के लगातार बहाव और जलभराव के कारण सड़क गल चुकी है। इस मुख्य मार्ग से क्षेत्र के तीन दर्जन से अधिक गांवों के हजारों ग्रामीण रोजाना जसपुरा ब्लॉक होते हुए मंडल मुख्यालय बांदा तक आते-जाते हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और कृषि कार्यों के लिए यह सड़क इस क्षेत्र की जीवन रेखा है। सड़क खराब होने से अब मरीजों को ले जाने और किसानों को अपनी उपज मंडी तक पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सुगम यातायात का सपना अब ग्रामीणों के लिए दिवास्वप्न बनकर रह गया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बालू माफियाओं की ओवरलोडिंग और जलभराव की इस गंभीर समस्या पर क्षेत्रीय तहसील प्रशासन पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठा है। करोड़ों की सरकारी संपत्ति की बर्बादी पर अधिकारियों की यह रहस्यमयी चुप्पी क्षेत्र में चर्चा और आक्रोश का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों ने इस मामले में तत्काल उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप कर ओवरलोडिंग पर रोक लगाने और सड़क मरम्मत कराने की मांग की है।


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