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Thursday, May 21, 2026

बच्चों के लिए स्वर्ण प्राशन संस्कार शिविर का किया गया आयोजन

कानपुर, प्रदीप शर्मा - वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक के निर्देशन में आरोग्य क्लिनिक, सी.एस.जे.एम. यूनिवर्सिटी स्वास्थ्य केंद्र, राजकीय बाल गृह कल्याणपुर एवं राजकीय बालिका गृह स्वरूप नगर में  आयोजित एक दिवसीय निःशुल्क स्वर्णप्राशन संस्कार शिविर का समापन गुरुवार को किया गया। इस अवसर पर नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन महिला फोरम, कानपुर की सचिव आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक द्वारा लगभग 150 बच्चों को निःशुल्क स्वर्णप्राशन संस्कार कराया गया। शिविर के दौरान बच्चों एवं उनके अभिभावकों को ग्रीष्म ऋतु के आगमन पर उचित आहार-विहार तथा आवश्यक सावधानियों के विषय में जानकारी दी गई। स्वर्णप्राशन संस्कार के महत्व के बारे में बताते हुए डॉ. वंदना पाठक ने बताया कि यह आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण विधा है, जो


बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास में सहायक है। यह भारतीय परंपरा में वर्णित 16 संस्कारों में से एक प्रमुख संस्कार है। नियमित रूप से स्वर्णप्राशन कराने वाले बच्चों में ऋतु परिवर्तन एवं वातावरण जनित रोग अपेक्षाकृत कम देखे जाते हैं। उन्होंने बताया कि

स्वर्णप्राशन में प्रयुक्त औषधि स्वर्ण भस्म, वच, गिलोय, ब्राह्मी, गौघृत एवं मधु आदि द्रव्यों के समन्वय से तैयार की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को डांटना या शारीरिक दंड देना उनके मानसिक स्वास्थ्य एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, अतः बच्चों का स्नेहपूर्ण एवं सकारात्मक वातावरण में लालन-पालन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि नियमित स्वर्णप्राशन से बालक तेजस्वी, स्वस्थ एवं मानसिक रूप से सुदृढ़ बनते हैं।

इस अवसर पर डॉ. वंदना पाठक ने बताया कि ग्रीष्म ऋतु का आगमन सामान्यतः मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत से होने लगता है और जून तक इसका प्रभाव बना रहता है। इस दौरान सूर्य की किरणें तीव्र हो जाती हैं, तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि होती है तथा वातावरण शुष्क एवं गर्म हो जाता है। विशेषकर मई और जून के महीनों में लू चलने लगती है, जिससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि अत्यधिक तैलीय एवं मसालेदार भोजन से बचना चाहिए तथा ताजे फल एवं हरी सब्जियों को आहार में शामिल करना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों एवं बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि वे गर्मी के प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।

डॉ पाठक ने बताया कि इन सावधानियों को अपनाकर ग्रीष्म ऋतु के दुष्प्रभावों से काफी हद तक बचा जा सकता है तथा इस मौसम को सुरक्षित एवं स्वस्थ तरीके से बिताया जा सकता है। इस समय सबसे महत्वपूर्ण है शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) से बचाव के लिए दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिये। इस अवसर पर बच्चों को मौसमी फल एवं जूस भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में सुमन, संगीता सचान, सिस्टर ऊषा, डॉ. अनुराग मिश्रा तथा आरोग्य क्लिनिक, लालबंगला के धर्मेंद्र, सावित्री, निशा एवं शेखर सहित अन्य व्यक्ति मौजूद रहे।

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